राजस्थान में महसूस किए गए भूकंप के झटके, घरों से बाहर निकले लोग

Rajasthan: राजस्थान के शेखावाटी में शनिवार सुबह भूकंप के हल्के झटके महसूस किए गए. रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता 3.5 दर्ज की गई. जयपुर से सीकर तक लोगों के बीच इस भूकंप ने हड़कंप मचा दिया. हालांकि भूकंप से किसी प्रकार के जान-माल के नुकसान की सूचना नहीं है. हालांकि, शहर में लगे एक सीसीटीवी कैमरे में झटकों के दौरान कंपन की आवाज रिकॉर्ड होने की बात सामने आई है.

3.5 रही तीब्रता

नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी (NCFS) से मिली जानकारी के अनुसार 7 मार्च 2026 को सुबह 6 बजकर 32 मिनट 59 सेकंड पर भूकंप दर्ज किया गया. इसका केंद्र जयपुर से लगभग 69 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम दिशा में स्थित था. वहीं भूकंप की तीव्रता को लेकर राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान ने कहा है कि रिक्टर स्केल पर यह 3.5 दर्ज किया गया. भूकंप का केंद्र जमीन से करीब 5 किलोमीटर नीचे बताया गया है. कम गहराई होने के कारण आसपास के क्षेत्रों में हल्का कंपन महसूस किया गया. काफी देर तक लोग भूकंप की वजह से घरों से बाहर ही रहे.

इन क्षेत्रों में अधिक महसूस हुए झटके

सीकर जिले के कई हिस्सों में लोगों ने कंपन महसूस किया. खास तौर पर खाटूश्यामजी, पलसाना, धींगपुर और इनके आसपास के इलाकों में झटकों की अनुभूति अपेक्षाकृत अधिक बताई जा रही है. कुछ लोगों ने घरों में हल्की कंपन और खिड़कियों-दरवाजों में हलचल महसूस होने की जानकारी दी. हालांकि झटके बहुत कम समय तक ही रहे, इसलिए किसी तरह की बड़ी दहशत की स्थिति नहीं बनी.

क्यों आते हैं भूकंप?

हाल के दिनों में देश-दुनिया के कई इलाकों में भूकंप की घटनाओं में बढ़ोतरी देखी जा रही है. हमारी धरती के भीतर 7 टेक्टोनिक प्लेट्स हैं. ये प्लेट्स लगातार अपने स्थान पर घूमते रहती हैं. हालांकि, कभी-कभी इनमें टकराव या घर्षण भी होता है. इसी कारण धरती पर भूकंप की घटनाएं देखने को मिलती हैं. इसका सबसे ज्यादा नुकसान आम जनजीवन को उठाना पड़ता है. भूकंप से मकानें गिर जाती हैं, जिसमें दबकर हजारों लोगों की मौत हो जाती है.

रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता

भूकंप की तीव्रता को रिक्टर स्केल के जरिए मापा जाता है. रिक्टर स्केल पर 4 से 4.9 तीव्रता के भूकंप में घर में रखा सामान अपनी जगह से नीचे गिर सकता है. 5 से 5.9 तीव्रता के भूकंप में भारी सामान और फर्नीचर भी हिल सकता है. 6 से 6.9 में इमारत का बेस दरक सकता है. 7 से 7.9 में इमारतें गिर जाती हैं. 8 से 8.9 में सुनामी का खतरा होता है और ज्यादा तबाही मचती है. 9 या ज्यादा में सबसे भीषण तबाही होती है.

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