अक्सर विचलित कर देती है अदम गोंडवी की कविताएं, ‘उलझ कर रह गयी है फाइलों के जाल में’

साहित्‍य। सोशल मीडिया के दुनिया में अदम गोंडवी सबसे अधिक कोट किए जाने वाले तथा लोक के कवि है। इनकी कविताएं सबसे ज़्यादा जातिवाद, भ्रष्टाचार, अत्याचार, शोषण, भुखमरी, बीमारी हमारे गांवों में ही है। प्रस्‍तुत है उनकी कविताएं –  जो उलझ कर रह गयी है फाइलों के जाल में
गांव तक वह रौशनी आएगी कितने साल में।

बूढ़ा बरगद साक्षी है किस तरह से खो गयी
राम सुधि की झौपड़ी सरपंच की चौपाल में।

खेत जो सीलिंग के थे सब चक में शामिल हो गए
हम को पट्टे की सनद मिलती भी है तो ताल में।

जिस्म क्या है रूह तक सब कुछ ख़ुलासा देखिये
आप भी इस भीड़ में घुस कर तमाशा देखिये।

जो बदल सकती है इस पुलिया के मौसम का मिजाज़
उस युवा पीढ़ी के चेहरे की हताशा देखिये।

जल रहा है देश यह बहला रही है क़ौम को
किस तरह अश्लील है कविता की भाषा देखिये।

मतस्यगंधा फिर कोई होगी किसी ऋषि का शिकार
दूर तक फैला हुआ गहरा कुहासा देखिये।

 

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