श्रीकृष्ण जन्मोत्सव को लेकर मथुरा में शुरू हुईं खास तैयारियां

Uttar Pradesh: श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर मथुरा की जन्मभूमि से लेकर वृंदावन के प्रसिद्ध मंदिरों को विशेष सजावट और धार्मिक आयोजनों की तैयारियां चल रही हैं। ब्रज में कान्हा के जन्मोत्सव की तैयारियां अब अंतिम चरण में हैं।  मथुरा-वृंदावन में एक साथ श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व मनाया जाता है। बता दें कि  ब्रज के कुछ प्रमुख मंदिरों में जन्मोत्सव की परंपराएं अलग हैं। कहीं आधी रात में कान्हा का जन्मोत्सव होगा तो कहीं दिन में ठाकुरजी का प्राकट्योत्सव मनाया जाएगा।

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का शुभ मुहूर्त

साल 2026 में मथुरा-वृंदावन समेत देशभर में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व 4 सितंबर, शुक्रवार को मनाया जाएगा। पंचांग के मुताबिक भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 4 सितंबर को रात 2 बजकर 25 मिनट से शुरू होकर 5 सितंबर की रात 12 बजकर 13 मिनट तक रहेगी। उदयातिथि के आधार पर 4 सितंबर को जन्माष्टमी मनाई जाएगी। इस दिन रोहिणी नक्षत्र रात 11 बजकर 04 मिनट तक रहेगा। इसके अगले दिन 5 सितंबर को ब्रज में नंदोत्सव की धूम रहेगी।

राधारमण में दिन में उत्सव

बता दें कि वृंदावन के राधारमण मंदिर में जन्माष्टमी की परंपरा कुछ अलग है। यहां रात के बजाय दिन में ठाकुरजी का प्राकट्योत्सव मनाया जाता है। 4 सितंबर को सुबह 9 बजे महाभिषेक शुरू होगा। दूध, दही, शहद, शर्करा और जड़ी-बूटियों से करीब दो घंटे तक ठाकुरजी का अभिषेक किया जाएगा। शाहजी और राधादामोदर मंदिर में भी दिन में प्राकट्योत्सव होगा।

बांकेबिहारी मंदिर में खास परंपरा

ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर में रात 12 बजे पंचामृत से ठाकुरजी का महाभिषेक किया जाता है। हालांकि इस विशेष अनुष्ठान के दौरान श्रद्धालुओं को दर्शन नहीं मिलते। जन्माष्टमी पर मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना की जाती है।

कान्हा के जन्मस्थान पर विशेष आयोजन

मथुरा स्थित श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर 4 सितंबर को भव्य जन्मोत्सव होगा। श्रद्धालुओं के लिए प्रवेश सुबह 5.30 बजे से रात 1.30 बजे तक रहेगा। प्रेम मंदिर, इस्कॉन मंदिर, चंद्रोदय मंदिर, रंगजी मंदिर समेत अन्य प्रमुख मंदिरों में भी जन्माष्टमी की तैयारियां जोरों पर हैं।

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