Yoga Tips: योग को रोज की दिनचर्या में शामिल करने से शरीर को स्वस्थ रखने के साथ मन को शांत और एकाग्र बनाए रखने में भी मदद मिल सकती है. योग के कई आसनों में भुजंगासन काफी महत्वपूर्ण माना जाता है. यह आसन खासतौर पर पीठ और रीढ़ की मांसपेशियों को मजबूत बनाने के लिए किया जाता है. इसके अभ्यास से शरीर में लचीलापन बढ़ाने और ताजगी महसूस करने में भी मदद मिल सकती है. भुजंगासन को अंग्रेजी में Cobra Pose कहा जाता है. इसे करते समय शरीर का ऊपरी हिस्सा सांप के फन की तरह ऊपर उठता है, इसलिए इसका नाम भुजंगासन पड़ा. इसे सर्पासन के नाम से भी जाना जाता है. यह सूर्य नमस्कार के 12 आसनों में आठवें स्थान पर आता है।
भुजंगासन करने से क्या फायदे मिलते हैं
भुजंगासन का नियमित अभ्यास शरीर के लिए कई तरह से फायदेमंद हो सकता है. खासकर पीठ, रीढ़ और शरीर के ऊपरी हिस्से की मांसपेशियों के लिए इसे उपयोगी माना जाता है।
रीढ़ की हड्डी को मजबूत बनाने में मदद
भुजंगासन करते समय रीढ़ और पीठ की मांसपेशियों में खिंचाव आता है. नियमित अभ्यास से पीठ की मांसपेशियों को मजबूत रखने और रीढ़ में लचीलापन बनाए रखने में मदद मिल सकती है।
शरीर का लचीलापन बढ़ाने में सहायक
लंबे समय तक बैठे रहने या कम शारीरिक गतिविधि के कारण शरीर में अकड़न महसूस हो सकती है. भुजंगासन शरीर के ऊपरी हिस्से को अच्छा स्ट्रेच देता है, जिससे शरीर का लचीलापन बनाए रखने में मदद मिल सकती है।
तनाव कम करने में मददगार
योग का संबंध सिर्फ शारीरिक फिटनेस से नहीं है, बल्कि यह मानसिक शांति के लिए भी उपयोगी माना जाता है। भुजंगासन करते समय सांसों पर ध्यान देने से तनाव और मानसिक थकान को कम करने में मदद मिल सकती है।
कब्ज और पाचन में सहायक
भुजंगासन के दौरान पेट के हिस्से पर हल्का दबाव और खिंचाव पड़ता है। इसका अभ्यास पाचन तंत्र को सक्रिय रखने और कब्ज जैसी परेशानी में सहायक हो सकता है। हालांकि, किसी गंभीर पाचन समस्या में सिर्फ योग को इलाज का विकल्प नहीं मानना चाहिए।
शरीर में ऊर्जा और ताजगी बनी रहती है
सुबह के समय योग करने से शरीर को सक्रिय रखने में मदद मिल सकती है। भुजंगासन भी शरीर की मांसपेशियों को सक्रिय करता है, जिससे अभ्यास के बाद शरीर में ताजगी और ऊर्जा महसूस हो सकती है।
भुजंगासन कैसे किया जाता है
भुजंगासन करने के लिए सबसे पहले किसी समतल और साफ जगह पर योग मैट बिछाकर पेट के बल लेट जाएं। दोनों पैरों को पीछे की ओर सीधा रखें और पैरों के पंजों को जमीन पर टिकाएं. अब दोनों हथेलियों को कंधों के पास जमीन पर रखें. कोहनियों को शरीर से सटाकर रखें. इसके बाद धीरे-धीरे सांस लेते हुए सिर, गर्दन और छाती को ऊपर की ओर उठाएं। इस दौरान नाभि के नीचे का हिस्सा जमीन से लगा रहना चाहिए. शरीर को उतना ही ऊपर उठाएं, जितना आसानी से उठा सकें. कंधों को ढीला रखें और गर्दन को जरूरत से ज्यादा पीछे की ओर न मोड़ें।