New Delhi: दिल्ली नगर निगम को नया मेयर मिल गया है। 29 अप्रैल को हुए चुनाव में भाजपा ने मेयर और उप मेयर दोनों पदों पर जीत दर्ज की है। मेयर पद पर भाजपा के प्रवेश वाही ने बड़ी जीत दर्ज की है जबकि उप मेयर पद पर भाजपा की मोनिका पंत ने जीत हासिल की है।
मेयर पद के लिए कुल 165 वोट पड़े, जिनमें भाजपा को 156 और कांग्रेस को 9 वोट मिले। मतदान के दौरान सदन की बैठक से आम आदमी पार्टी (आप) के पार्षद सदन से अनुपस्थित रहे। मतगणना से पहले ही भाजपा के प्रत्याशी प्रवेश वाही की जीत लगभग तय मानी जा रही थी, क्योंकि भाजपा के पास मेयर बनाने के लिए जरूरी वोटों से ज्यादा संख्या थी।
बिना किसी चुनौती के बन गए मेयर
चुनाव में BJP के पास पर्याप्त बहुमत होने और आम आदमी पार्टी (AAP) के चुनाव न लड़ने के कारण प्रवेश वाही बिना किसी चुनौती के दिल्ली के नए मेयर बन गए. MCD महापौर चुनाव में कुल 273 मतदाता में 249 पार्षद, सांसद और दिल्ली विधानसभा द्वारा नामित 14 विधायक शामिल हैं. BJP के पास लगभग 141.143 वोट हैं, जबकि AAP के पास करीब 106 वोट हैं. कांग्रेस ने हाजी जरिफ को अपना उम्मीदवार बनाया था, लेकिन संख्या बल होने के कारण पहले से ही BJP की जीत सुनिश्चित मानी जा रही थी.
प्रवेश वाही तीन बार के पार्षद
एक उम्मीदवार को जीत के लिए न्यूनतम 137 वोटों की जरूरत थी. प्रवेश वाही रोहिणी ई वार्ड से तीन बार के पार्षद हैं. वर्तमान में वे MCD सदन में नेता सदन की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. BJP ने 23 अप्रैल को नामांकन के अंतिम दिन उन्हें महापौर पद का उम्मीदवार घोषित किया. साथ ही मोनिका पंत को उप-महापौर और अन्य पदों के लिए भी उम्मीदवार बनाया गया.
मुख्यमंत्री ने भी उन पर जताया था भरोसा
इससे पहले प्रवेश वाही ने नामांकन भरते समय कहा था कि मैं पार्टी के शीर्ष नेतृत्व का आभार व्यक्त करता हूं. हम दिल्ली को स्वच्छ, सुंदर और बेहतर बनाने की दिशा में पूरे समर्पण से काम करेंगे. उनके अनुभव को देखते हुए पार्टी और मुख्यमंत्री ने भी उन पर भरोसा जताया था. इससे केंद्र और MCD के बीच बेहतर समन्वय की उम्मीद है.
RSS की पृष्ठभूमि से जुड़े हैं वाही
प्रवेश वाही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की पृष्ठभूमि से जुड़े हैं. वे रोहिणी क्षेत्र से मजबूत जनाधार रखते हैं. MCD चुनाव 2022 में BJP के 123 पार्षद जीते थे, जिसके बाद से वे सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं. उनकी संपत्ति और शैक्षणिक योग्यता को लेकर भी चर्चा रही है, लेकिन राजनीतिक अनुभव उन्हें इस पद के लिए उपयुक्त बनाता है. महापौर का कार्यकाल मात्र एक वर्ष का होता है.
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