सृष्टि के रचयिता, पालक और संहारक हैं भगवान श्री गणेश: दिव्य मोरारी बापू

Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा कि भगवान् श्रीगणेशजी का प्राकट्य उत्सव-महोत्सव-भगवान श्रीगणेशजी के प्राकट्य और उत्सव महोत्सव की कथा भगवान व्यास ने कई पुराणों में लिखा है।

1-श्रीमत्स्यपुराण ÷श्रीमत्स्यपुराण में एक उपाख्यान है कि पार्वती ने अपने शरीर के अंगलेप से एक क्रीडनक निर्मित किया। इसके सिर की आकृति गज के सदृश्य थी। उन्होंने उसको लाकर गंगाजल से जैसे अभिषेक किया। वैसे ही वह प्राणवान हो गया। उसे पार्वती एवं गंगा दोनों ने अपना पुत्र माना। यही पुत्र गणेश नाम से विख्यात हुए।

2-लिंगपुराण ÷ लिंगपुराण के अनुसार देवों ने भगवान शिव से अनुरोध किया कि आप किसी ऐसी शक्ति का प्रादुर्भाव करें।जो कि सभी प्रकार के विघ्नों का निवारण किया करें। देवों की प्रार्थना के अनुसार भगवान शिव ने स्वयं ही ‘ श्री गणेश जी ‘ के रूप में अवतार ग्रहण किए।

3-श्रीसौरपुराण =तैत्तिरीयब्राह्मण ÷ तैत्तिरीय ब्राह्मण में गणेश जी के वाहन को भगवान शिव का वाहन कहकर तथा सौरपुराण में गणेश जी को साक्षात् शिव ही कहकर यह सिद्ध करने की चेष्टा की गई कि- श्री गणेश जी और भगवान शिव दोनों एक ही हैं।

4-श्रीब्रह्मवैवर्तपुराण ÷ श्रीब्रह्मावैवर्तपुराण केमतानुसार गणेश जी का श्री विष्णु के साथ तादात्म्य है। भगवान विष्णु शिव से कहते हैं कि पार्वती से एक पुत्र होगा जो समस्त विघ्नों का नाश करेगा। इतना कहकर भगवान विष्णु एक बालक का रूप धारण करके शिव के आश्रम में गये।वे पार्वती जी की शैय्या पर बालक के रूप में लेट गये। पार्वती ने उन्हें अपना पुत्र माना। यही पुत्र गणेश के नाम से लोग विश्रुत हुआ।

5-श्रीशिवमहापुराण÷श्रीशिवमहापुराण के अनुसार पार्वती ने अपने शरीर के अनुलेप से एक मानवाकृति निर्मित की और उसे आज्ञापित किया कि मैं स्नान करने जा रही हूं। जब तक मैं न कहूं तब तक तुम घर के अन्दर किसी को मत आने देना। तुम गृहद्वार पर पहरा दो। यही गृह द्वाररक्षक शक्ति गणेश के नाम से अभिहित हुई और इन्हीं के साथ भगवान शिव का संग्राम हुआ।

6-श्रीगणेशपुराण एवं श्रीगणेश सम्प्रदाय÷ गणेश सम्प्रदाय एवं गणेश पुराण में भगवान गणपति को महाविष्णु एवं सदाशिव कहा गया है। और उन्हें साक्षात् परात्पर ब्रह्म माना गया है।वे ही प्रपंच की सृष्टि, स्थिति और संहार के आदि कारण हैं। उन्हीं से ब्रह्मा, विष्णु , महेश का प्रादुर्भाव हुआ है।

सभी हरि भक्तों को पुष्कर आश्रम एवं गोवर्धनधाम आश्रम से साधु संतों की शुभ मंगल कामना, श्री दिव्य घनश्याम धाम, श्री गोवर्धन धाम कॉलोनी, बड़ी परिक्रमा मार्ग, दानघाटी, गोवर्धन, जिला-मथुरा, (उत्तर-प्रदेश) दिव्य मोरारी बापू धाम सेवा ट्रस्ट, गनाहेड़ा, पुष्कर जिला-अजमेर (राजस्थान).

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