Independence Day 2026: देश के 80वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले पर तिरंगा फहराया और सलामी दी. इस दौरान वहां अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, अजित डोभाल समेत अम्य गणमान्य अतिथि मौजूद रहे. इस दौरान वंदे मातरम् के 150 साल पूरे होने का जश्न भी मनाया गया.
लालकिले की प्राचीर से राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में पीएम मोदी ने कहा कि आज हम सब 80वां स्वतंत्रता दिवस मना रहे हैं. आज हर दिल की धड़कन ‘वंदे मातरम’ के नाद से गूंज रही है. आज हर घर तिरंगा है, हर मन तिरंगा है. देश उत्साह और उमंग के साथ नए संकल्पों को लेकर आज आगे बढ़ रहा है.
महान क्रांतिकारियों को किया नमन
इस दौरान पीएम मोदी ने कहा, “आप सबको स्वतंत्रता दिवस की बहुत-बहुत शुभकामनाएं हैं. देश आज उन महान सपूतों का फिर से स्मरण करता है, जिन्होंने देश की आजादी के लिए त्याग और बलिदान की पराकाष्ठा की.” उन्होंने कहा कि अपने तप त्याग और बलिदान से आजादी के एकमात्र लक्ष्य को लेकर, अपनी पूरी जिंदगी खपा दी. पूज्य बापू समेत सभी स्वतंत्रता सेनानियों को बलिदान की महान परंपरा जगाने वाले, महान क्रांतिकारियों को आज मैं श्रद्धापूर्वक नमन करता हूं.
आज एक ऐतिहासिक पल भी है
प्रधानमंत्री ने कहा, “आज जो इस समारोह में उपस्थित हैं, उन सभी के लिए आज एक ऐतिहासिक पल भी है. आजादी के बाद 15 अगस्त, लाल किले पर पहली बार ‘वंदे मातरम’ गूंज रहा है. आज जब हम देश के लोग ‘वंदे मातरम’ के 150 वर्ष मना रहे हैं, तो इससे बड़ा उत्तम अवसर क्या हो सकता है.”
2047 में विकसित भारत बनाकर रहेंगे
इस दौरान पीएम मोदी ने कहा, ‘आज भारत ने एक बहुत बड़ा सपना देखा है. इसे पूरे संकल्प के साथ देखा है. इसे नई ऊंचाइयों तक ले जाने का सपना देखा है. और वह सपना यह है कि जब भारत 2047 में अपनी आज़ादी के 100 साल पूरे करेगा, तब हम निश्चित रूप से एक ‘विकसित भारत’ का निर्माण करेंगे और उसे साकार करेंगे. 140 करोड़ देशवासियों की कड़ी मेहनत और प्रयासों से हमें यह लक्ष्य हासिल करना है. और जब दुनिया का सबसे ज़्यादा आबादी वाला देश विकसित बनने का संकल्प लेता है, तो यह पूरी दुनिया के सामने हमारे साहस का प्रमाण बन जाता है. दुनिया हमारे प्रति अपना नज़रिया बदलने पर मजबूर हो जाती है.’
सभी ने देश को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए प्रयास किया
अपने संबोधन में पीएम मोदी ने कहा, ‘मेरे प्यारे देशवासियों, और मैं यह बात यूं ही नहीं कह रहा हूं. पिछले 12 वर्षों में, देश के करोड़ों-करोड़ नागरिकों ने – चाहे वे दलित हों, शोषित हों, वंचित हों, आदिवासी हों, गांवों में रहने वाले हों या शहरों में, गरीब हों या मध्यम वर्ग के, चाहे युवा हों, बुजुर्ग हों, महिलाएं हों या पुरुष; चाहे उत्तर, दक्षिण, पूर्व या पश्चिम से हों – सभी ने पिछले 12 वर्षों में दृढ़ संकल्प और समर्पण के साथ देश को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए हर संभव प्रयास किया है. मैं उनके प्रयासों को नमन करता हूं और उनका सम्मान करता हूं.’
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