Earth Shape: रात के आसमान की तरफ देखें या फिर अंतरिक्ष से ली गई तस्वीरों पर नजर डालें तो एक बात साफ हो जाती है कि पृथ्वी गोल है. लेकिन यह सिर्फ इत्तेफाक नहीं है. इसके पीछे एक बड़ी वजह है. मगर सवाल यह उठता है कि अगर पृथ्वी चपटी होती तो क्या होता? आइए जानते हैं इस सवाल का जवाब.
मुख्य कारण और तथ्य
गुरुत्वाकर्षण का संतुलन: गुरुत्वाकर्षण हर चीज को केंद्र की ओर खींचता है, और एक गोलाकार (sphere) ही एकमात्र ऐसा आकार है जो गुरुत्वाकर्षण के कारण पैदा होने वाली इस “केंद्र की ओर खिंचाव” को समान रूप से संतुलित करता है
बनावट का समय: जब पृथ्वी शुरू में गैस और तरल चट्टानों से बनी थी, तब गुरुत्वाकर्षण ने उसे चारों तरफ से अंदर की ओर खींचा, जिससे वह गोलाकार हो गई.
सेंट्रीफ्यूगल बल (Centrifugal Force): पृथ्वी के अपने अक्ष पर तेजी से घूमने के कारण, भूमध्य रेखा (Equator) पर बाहर की ओर एक बल लगता है, जिससे यह भूमध्य रेखा पर थोड़ी उभरी हुई और ध्रुवों पर चपटी हो गई है (इसे oblate spheroid कहा जाता है).
वैज्ञानिक आकार (Geoid): पृथ्वी का आकार पूरी तरह से गोल न होकर एक “Geoid” या ‘अंडाकार’ (spheroid) है, क्योंकि इसका घनत्व और गुरुत्वाकर्षण का प्रभाव हर जगह पूरी तरह समान नहीं है.
वायुमंडल और चुंबकीय क्षेत्र: एक गोलाकार पृथ्वी स्थिर वायुमंडल और चुंबकीय क्षेत्र बनाए रखने में मदद करती है. इस आकार के बिना सौर हवा उस हवा को छीन सकती है जिसमें हम सांस लेते हैं. ऐसे समय में पृथ्वी एक बेजान ग्रह जैसी लगती. पृथ्वी पर सांस लेने लायक ऑक्सीजन ही नहीं होती और आसमान अंधेरा और खाली होता.
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