Religion: वास्तु शास्त्र में पेड़-पौधों को प्रकृति और सकारात्मक ऊर्जा का स्रोत माना जाता है। यही वजह है कि किसी पेड़ को काटने से पहले समय और विधि का ध्यान रखना चाहिए। खासतौर पर सूखे, अनुपयोगी या ऐसी जगह पर लगे पेड़ जो किसी तरह की अड़चन पैदा कर रहे हों, उन्हें काटने के लिए भी वास्तु शास्त्र में कुछ नियम बताए गए हैं। वास्तु शास्त्र की मान्यता यह है कि किसी भी समय पेड़ पर कुल्हाड़ी नहीं चलाना चाहिए। सूखा पेड़ काटने से पहले किन नियमों का ध्यान रखना जरूरी माना गया है।
पेड़ काटने के लिए शुभ है ये 10 नक्षत्र
लोग अवांछित वृक्षों को काट देते हैं, लेकिन किसी भी समय इन पेड़ों को काटना अनुचित माना जाता है। इसके लिये एक सही समय होता है, जिसका पालन जरूर करना चाहिए। वास्तु शास्त्र के मुताबिक पेड़ काटने के लिए मृगशिरा, पुनर्वसु, अनुराधा, हस्त, मूल, उत्तराफाल्गुनी, उत्तराषाढ़ा, उत्तराभाद्रपद, स्वाति और श्रवण नक्षत्र को अनुकूल माना गया है।
पेड़ काटने से पहले करें पूजा-प्रार्थना
पेड़ काटने से पहले उसकी विधि पूर्वक पूजा करनी चाहिए। इसके लिए गंध, पुष्प और नैवेद्य से वृक्ष का पूजन करने की बात कही गई है। इसके बाद उसके तने को साफ कपड़े से ढककर सफेद सूत लपेटने का विधान है। पूजा के दौरान वृक्ष से जुड़े जीवों और उसमें रहने वाले प्राणियों के कल्याण की कामना करें। साथ ही उनसे दूसरे स्थान पर चले जाने की प्रार्थना की जाती है। वहीं, वृक्ष से अपने कार्य के लिए पूजा स्वीकार करने की विनती करने की परंपरा बताई गई है।
इस दिशा से काटें वृक्ष
पूजा और प्रार्थना के बाद वृक्ष को जल से सींचने की बात कही गई है। इसके बाद मधु और घी लगाए हुए कुल्हाड़े से वृक्ष को काटने का विधान है। वास्तु अनुसार, पेड़ को पूर्व से उत्तर दिशा की ओर बढ़ते हुए उसके चारों तरफ घूमकर काटना चाहिए। वृक्ष को गोलाई में काटने की बात कही गई है।