Tara weapon system: रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) और भारतीय वायु सेना (IAF) ने ओडिशा तट पर टैक्टिकल एडवांस्ड रेंज ऑग्मेंटेशन (TARA) हथियार का पहला सफल उड़ान परीक्षण किया है। इस उन्नत हथियार प्रणाली को पूरी तरह से स्वदेशी तकनीक से डिजाइन किया गया है। इसका विकास हैदराबाद स्थित रिसर्च सेंटर इमारत (RCI) और DRDO की अन्य सहयोगी प्रयोगशालाओं ने मिलकर किया है।
सटीक दिशा में बमों को निर्देशित करेगा TARA
यह वेपन सिस्टम अनिर्देशित बमों को सटीक निर्देशित गोला-बारूद में बदलने के लिए डिजाइन किया गया है। TARA विंग का इस्तेमाल कर मारक क्षमता को 150-180 किलोमीटर तक बढ़ाता है।
दुश्मन के एयर डिफेंस के खतरे को करेगा कम
TARA में EO/IR गाइडेंस की सुविधा है, जिसका मकसद जमीनी टारेगट के खिलाफ मारक क्षमता में बढ़ोतरी करना है। इससे दुश्मन के एयर डिफेंस से पायलटों को होने वाला खतरा कम हो सकता है। TARA की खास बात है कि यह जिस टारगेट पर बम चलाता है वह उस लक्ष्य को भेदने के लिए वहां टारगेट के 3 मीटर के सर्किल में गिरते हैं और उच्च सटीकता सुनिश्चित करते हैं।
DRDO और RCI ने डेवलप किया है TARA
रक्षा मंत्रालय की तरफ से जारी एक प्रेस रिलीज के मुताबिक, TARA को हैदराबाद स्थित Research Centre Imarat द्वारा अन्य DRDO लैब के साथ मिलकर डिजाइन और डेवलप किया गया है, ताकि कम लागत वाले हथियार की सटीकता को बढ़ाया जाए और उसकी मारक क्षमता में इजाफा कर जमीनी लक्ष्यों को निष्क्रिय किया जा सके।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने दी बधाई
सफल उड़ान परीक्षण के लिए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने डीआरडीओ, भारतीय वायु सेना, डीसीपीपी और उद्योग जगत को बधाई दी. उन्होंने इसे भारत की स्वदेशी रक्षा क्षमताओं को आगे बढ़ाने की दिशा में एक अहम उपलब्धि बताया. DRDO के सचिव और अध्यक्ष डॉ. समीर वी. कामत ने भी सफल उड़ान परीक्षण में शामिल टीमों को बधाई दी.
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