First census: भारतीय और विदेश के इतिहास में 9 फरवरी की तारीख बहुत ही खास है. आज ही के दिन आजादी के बाद पहली जनगणना की तैयारी शुरू हुई थी. भारत आज दुनिया की सबसे बड़ी जनसंख्या वाला देश बन चुका है. अनुमान के मुताबिक, भारत की आबादी 147 करोड़ से भी ज्यादा है. ऐसे में इतनी बड़ी आबादी की गिनती यानी जनगणना भी एक महत्वपूर्ण काम है. इस प्रक्रिया को भारत के सबसे बड़े प्रशासनिक कार्यों में से एक माना जाता है. आपको बता दें कि 9 फरवरी 1951 को ही आजाद भारत की पहली जनगणना शुरू की गई थी. आइए जानते हैं कि तब कितनी थी हमारे देश की आबादी.
कब से कब तक चली थी पहली जनगणना?
आजाद भारत की पहली जनगणना साल 1951 में आयोजित की गई थी. इस जनगणना की अवधि 9 फरवरी से लेकर 28 फरवरी तक थी. इसके बाद 1 मार्च से 3 मार्च तक पुनरीक्षण का कार्य किया गया. इस जनगणना में लोगों से उनके नाम, संबंध, जन्म स्थान, लिंग, आयु, आर्थिक स्थिति, आजीविका के मुख्य और सहायक साधन, धर्म, मातृभाषा और साक्षरता जैसी जानकारी ली गई. आपको बता दें कि भारत के बंटवारे की वजह से देश की सीमाएं बदलने, बड़ी संख्या में लोगों के पलायन और धार्मिक तौर पर जनसंख्या का अनुपात बदलने के कारण ये 1951 की जनगणना काफी अहम थी.
1951 में कितनी थी भारत को जनसंख्या?
1951 में आयोजित की गई आजाद भारत की पहली जनगणना के अनुसार भारत की आबादी 36,10,88,090 दर्ज की गई थी. आंकड़ों के मुताबिक इस दौरान भारत की आबादी का केवल 18 प्रतिशत हिस्सा ही साक्षर था और भारत की औसत जीवन प्रत्याशा सिर्फ 32 वर्ष थी. भारत में प्रति 1000 पुरुषों के मुकाबले महिलाओं का लिंगानुपात 946 का था. भारत की आबादी में 84.1 प्रतिशत हिन्दू, 9.8 प्रतिशत मुस्लिम, 2.3 प्रतिशत ईसाई, 1.9 प्रतिशत सिख और इसके अलावा कुछ अन्य धर्मों की संख्या भी थी.
वर्तमान में कितनी है भारत की आबादी?
भारत वर्तमान समय में चीन को पीछे छोड़ कर दुनिया का सबसे ज्यादा आबादी वाला देश बन चुका है. PIB के मुताबिक, भारत की जनसंख्या में प्रतिवर्ष 1.5 करोड़ लोगों की वृद्धि होती है, जो विश्व में सबसे अधिक है. विश्व की कुल जनसंख्या का लगभग 17 प्रतिशत हिस्सा भारत में रहता है. विभिन्न रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत की वर्तमान आबादी 1 अरब 47 करोड़ को पार कर चुकी है. भारत की साक्षरता दर वर्तमान में 80 प्रतिशत से भी ज्यादा है. धार्मिक तौर पर आबादी की बात करें तो भारत में 2011 की जनगणना के अनुसार हिंदू आबादी 79.8 प्रतिशत, मुस्लिम आबादी 14.2 प्रतिशत, ईसाई आबादी 2.38 फीसदी, सिख आबादी 1.7 फीसदी है.
स्वतंत्रता-पूर्व अवधि में जनगणना की शुरूआत
- जनगणना का इतिहास 1800 ई. से शुरू हुआ जब इंग्लैंड ने अपनी जनगणना शुरू की थी.
- इसकी निरंतरता में जेम्स प्रिंसेप द्वारा इलाहाबाद (वर्ष 1824) और बनारस (वर्ष 1827-28) में जनगणना करवाई गई.
- एक भारतीय शहर की पहली पूर्ण जनगणना वर्ष 1830 में हेनरी वाल्टर द्वारा ढाका (अब बांग्लादेश में) में आयोजित की गई थी.
- दूसरी जनगणना वर्ष 1836-37 में फोर्ट सेंट जॉर्ज द्वारा की गई थी.
- वर्ष 1849 में भारत सरकार ने स्थानीय सरकारों को जनसंख्या का पंचवर्षीय संचालन करने का आदेश दिया.
- पहली गैर-तुल्यकालिक जनगणना: यह भारत में वर्ष 1872 में गवर्नर-जनरल लॉर्ड मेयो के शासन काल के दौरान आयोजित की गई थी.
- पहली तुल्यकालिक जनगणना: पहली तुल्यकालिक जनगणना 17 फरवरी, 1881 को ब्रिटिश शासन के तहत डब्ल्यू.सी. प्लौडेन (भारत के जनगणना आयुक्त) द्वारा करवाई गई.
- तब से हर दस साल में एक बार निर्बाध रूप से जनगणना की जाती रही है.
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