Dhanteras 2026: दीपावली से पहले धन और समृद्धि का पर्व धनतेरस मनाया जाता है. इस साल कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी 06 नवंबर 2026, शुक्रवार को पड़ रही है. मान्यता है कि इस दिन भगवान धन्वंतरि के साथ देवी लक्ष्मी और कुबेर की पूजा से साल भर घर में बरकत बनी रहती है.धनतेरस पर सोना-चांदी, पीतल के बर्तन, झाड़ू, नमक और लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति खरीदना बेहद शुभ माना गया है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि मूर्ति खरीदते समय एक छोटी सी गलती आपके पूजन का फल कम कर सकती है? शास्त्रों में मूर्ति चयन के स्पष्ट नियम बताए गए हैं.
1. बायीं सूंड वाले गणपति ही लाएं घर
बाजार में दायीं और बायीं दोनों तरह की सूंड वाली मूर्तियां मिलती हैं, लेकिन वास्तु के अनुसार बायीं ओर झुकी सूंड वाले गणेश जी गृहस्थों के लिए सबसे शुभ होते हैं. इन्हें वाममुखी गणपति कहा जाता है और इनकी पूजा आसानी से फलदायी होती है.
2. मूषक और मोदक का जरूर ध्यान दें
गणेश जी की ऐसी मूर्ति चुनें जिसमें उनका वाहन मूषक चरणों में बैठा हो और हाथ में मोदक हो. यह समृद्धि और संतुष्टि का प्रतीक है. बिना वाहन या बिना मोदक वाली मूर्ति अधूरी मानी जाती है.
3. उल्लू वाली लक्ष्मी भूलकर भी न खरीदें
बहुत लोग अनजाने में उल्लू पर बैठी लक्ष्मी जी की मूर्ति ले आते हैं. शास्त्रों में इसे अलक्ष्मी का प्रतीक बताया गया है. यह घर में अस्थिरता लाती है. साथ ही खड़ी मुद्रा वाली लक्ष्मी भी चंचलता का प्रतीक है, इससे बचें.
4. कमल पर बैठी लक्ष्मी सबसे उत्तम
सबसे शुभ वह मूर्ति है जिसमें मां लक्ष्मी कमल के आसन पर बैठी हों और हाथों से धन वर्षा कर रही हों. ऐसी मूर्ति को ‘कमलासना लक्ष्मी’ कहा जाता है और यह स्थायी धन का वास कराती है.
5. जुड़ी हुई मूर्ति है बड़ा दोष
आजकल सिंगल बेस पर जुड़ी हुई लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियां खूब बिकती हैं, लेकिन ज्योतिष में इसे दोषपूर्ण बताया गया है. लक्ष्मी और गणेश दोनों की ऊर्जा अलग-अलग है, इसलिए हमेशा दो अलग-अलग मूर्तियां ही खरीदें.
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