फोन को फुल ब्राइटनेस पर इस्तेमाल करना बेहद खतरनाक, बैटरी, आंख और फोन तीनों पर पड़ता है प्रभाव

Display Brightness Effect: आज के डिजिटल दौर में स्मार्टफोन हम सब के जीवन का एक अभिन्न अंग बन चुका है। सुबह उठते ही फोन संभालने से लेकर रात को सोने तक हर समय फोन हाथ में और दिन में कई-कई घंटे हमारी आंखों के सामने रहता है. अक्सर ये देखने को मिलता है कि रील्स और वीडियो देखते समय अपने फोन की ब्राइटनेस को पूरे 100% पर सेट कर देते हैं। कई लोग तो घर के अंदर या रात के अंधेरे में भी फुल ब्राइटनेस पर ही फोन चलाना पसंद करते हैं।  जो आंखों की रोशनी पर बुरा प्रभाव डालते है. इसलिए ब्राइटनेस को हमेशा फुल रखने से बचने की सलाह दी जाती है.

फुल ब्राइटनेस डिस्प्ले के लिए खतरा

  • लगातार फुल ब्राइटनेस पर फोन रखने से विशेषकर एमोलेड डिस्प्ले वाले फोन में ‘स्क्रीन बर्न-इन’ या ‘घोस्ट इमेज’ की समस्या आ जाती है।
  • एक बार स्क्रीन बर्न-इन होने पर इसे ठीक नहीं किया जा सकता, और फिर स्क्रीन बदलने के लिए आपको हजारों रुपये खर्च करने पड़ सकते हैं।
  • दरअसल, स्क्रीन के पिक्सल्स अत्यधिक लाइट और गर्मी के कारण अंदर से झुलस जाते हैं, जिससे स्क्रीन पर हमेशा के लिए धुंधले धब्बे या परछाई दिखने लगती है।

फोन भट्टी की तरह गर्म होना

  • फोन की स्क्रीन सबसे ज्यादा बिजली खाती है, ब्राइटनेस 100% रखने पर बैटरी बहुत तेजी से खत्म होने लगती है।
  • लगातार अत्यधिक हीटिंग के कारण स्मार्टफोन की बैटरी की कुल उम्र तेजी से घट जाती है और ऐसे में बैटरी फूल भी सकती है।
  • फुल लाइट पैदा करने के लिए फोन के आंतरिक पार्ट्स पर भारी लोड पड़ता है, जिससे फोन गर्म होकर हैंग होने लगता है।

आंखों की रोशनी और मानसिक सेहत पर सीधा हमला

  • फुल ब्राइटनेस से निकलने वाली तेज ‘ब्लू लाइट’ आंखों के लेंस को थका देती है, जिससे आंखें लाल होना और पानी आने की समस्या होती है।
  • लंबे समय तक यह आदत बनी रहने से आंखों की ड्राईनेस बढ़ जाती है और छोटी उम्र में ही मोटा चश्मा चढ़ने का खतरा रहता है।

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