जीवन में सदगुणों की स्थापना होने से प्रभु की मिलती है कृपा: दिव्य मोरारी बापू 

Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा कि माता पार्वती के द्वारा भगवान शिव से श्री राम कथा विषयक चौदह प्रश्न, श्रीरामावतार का कारण और भगवान् श्रीराम के प्राकट्य की कथा का गान किया गया। कलिपावनावतार विश्ववन्द्य कविकुल दिवाकर वैष्णव कुलभूषण पूज्य गोस्वामी श्री तुलसीदास जी महाराज श्री रामचरितमानस में भगवान के अवतार का कारण बताते हुए कहते हैं- अगुन अरूप अलख अज जोई। भगत प्रेम बस सगुन सो होई।।

भगवान के अवतार का प्रधान कारण भक्तों का प्रेम है। भक्त भगवान से प्रार्थना करते हैं कि- प्रभु हम लोग साधना करके, साधना रूपी सीढ़ी का आश्रय लेकर आपके चरणों तक अगर पहुंच सकते हैं तो, आप भी नीचे उतर सकते हैं, अगर हम लोग आपके चरणों में पहुंचेंगे तो थोड़े से लोग पहुंचेंगे, लेकिन आप करुणा कृपा करके अगर अवतार ले लें तो पूरे संसार को आपका दर्शन,ध्यान, कथा, चिंतन प्राप्त हो जायेगा, और पूरे जगत का मंगल होगा।

भक्तों की प्रार्थना सुनकर भगवान अपनी ऊंचाई छोड़कर नीचे उतर आते हैं, श्री राम और श्री कृष्ण के रूप में हम आपके बीच में आकर खड़े हो जाते हैं, तब लोग कहते हैं भगवान का अवतार हो गया। अवतार शब्द संस्कृत के अवतरणिका शब्द से बना है, जिसका अर्थ होता है सीढ़ी जिससे नीचे उतरना। अवतार भगवान की प्रत्यक्ष करुणा है।

अवतार लेकर भगवान तीन काम करते हैं,दुष्टों का संहार, सज्जनों की स्थापना और बीच में जो लीला होती है वही लीला श्रीरामायण, श्रीभागवत के रूप में हम भक्तों को प्राप्त हो जाती है जिसे गा सुन करके हम लोग अपना मंगल करते हैं।  इसका आध्यात्मिक पक्ष यह है कि- कोई व्यक्ति श्रेष्ठ कर्म करते हुए ईश्वर की आराधना करता है तो उसके जीवन में भगवान की कृपा उतरती है और भगवान की कृपा उतरी तो तीन काम होता है, उसके दुर्गुणों का संहार, उसके जीवन में सद्गुणों की स्थापना और उसका जीवन दिव्य बन जाता है। उसके जीवन चरित को पढ़-सुन करके लोग अपना मंगल करते हैं। जिसमें भगवान उतर जाते हैं उसी को कर्माबाई,मीराबाई कर्मेती बाई, रत्नावती, श्रीधन्नाजी भगत, श्री गोस्वामी तुलसीदास जी महाराज, सूरदास जी महराज कहते हैं। जिसमें भगवान उतर जाते हैं उसी को संत या भक्त कहते हैं।

रामावतार के कारण में चार कल्पों की कथा भगवान शिव ने सुनाया। जय विजय की कथा, जालन्धर और सती वृंदा की कथा, नारद जी की कथा, मनु शतरूपा और राजा प्रतापभानु की कथा। रामायण में श्री राम जन्म के पहले रावण जन्म की कथा आ गई, सही भी है अंधेरा पहले आता है प्रकाश की व्यवस्था बाद में की जाती है। रावण का चरित समाज के लिए अंधकार है और श्री राम का चरित समाज के लिए प्रकाश है। भगवान श्री राम के प्राकट्य की कथा का गान किया गया और चारों लाल जी का उत्सव-महोत्सव धूमधाम से मनाया गया। कल की कथा में बाललीला, यज्ञरक्षा, अहिल्या उद्धार की कथा का गान किया जायेगा।

सभी हरि भक्तों को पुष्कर आश्रम एवं गोवर्धनधाम आश्रम से साधु संतों की शुभ मंगल कामना, श्री दिव्य घनश्याम धाम, श्री गोवर्धन धाम कॉलोनी, बड़ी परिक्रमा मार्ग, दानघाटी, गोवर्धन, जिला-मथुरा, (उत्तर-प्रदेश) दिव्य मोरारी बापू धाम सेवा ट्रस्ट, गनाहेड़ा, पुष्कर जिला-अजमेर (राजस्थान).

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