Chandra Grahan 2026: हिंदू धर्म मेंचंद्र ग्रहण को विशेष महत्व दिया गया है. मान्यता है कि ग्रहण काल में सिर्फ चंद्रमा का रंग ही नहीं बदलता है, बल्कि आसपास की ऊर्जा भी बदल जाती है, जिसका असर हमारे मन, शरीर और घर के माहौल पर पड़ सकता है. इसलिए इस समय कुछ खास वास्तु नियमों का पालन करना जरूरी होता है, जिससे आपके घर की ऊर्जा हमेशा पॉजिटिव बनी रहे. साथ ही जीवन पर इसका कोई खास असर न हो. आइए जानते हैं ग्रहण काल में किन बातों का ध्यान रखना चाहिए.
ग्रहण से पहले करें घर की साफ-सफाई
चंद्र ग्रहण शुरू होने से पहले घर की अच्छी तरह सफाई कर लें. वास्तु के अनुसार साफ-सुथरा घर सकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करता है. पूजा स्थान को भी विशेष रूप से साफ रखें और वहां दीपक जलाकर रखें. कई लोग ग्रहण से पहले खाने-पीने की चीजों में तुलसी के पत्ते डालते हैं, जिसे शुद्धता बनाए रखने का प्रतीक माना जाता है.
ग्रहण काल में बरतें सावधानी
- ग्रहण में जरूरी न हो तो बाहर निकलने से बचना चाहिए. घर के अंदर शांति बनाए रखें और अधिक शोर-शराबा न करें. इस समय पूजा-पाठ, ध्यान या मंत्र जाप करना लाभकारी माना जाता है. “ॐ नमः शिवाय” या “ॐ चंद्राय नमः” मंत्र का जाप मानसिक शांति देता है.
- ग्रहण काल के दौरान खिड़कियां और दरवाजे बंद रखना और रसोई में नया भोजन न बनाना भी परंपरा का हिस्सा है.
सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाने के वास्तु उपाय
ग्रहण शुरू होने से पहले घर के दक्षिण दिशा में घी का दीपक जलाएं. कपूर या लोबान से घर में धूप करने से वातावरण सुगंधित और शांत रहता है. ग्रहण समाप्त होने के बाद पूरे घर में गंगाजल का छिड़काव करना भी शुभ माना जाता है. यह उपाय मानसिक संतुलन और सकारात्मक सोच को बढ़ावा देते हैं.
जल अर्पण और दान-पुण्य के उपाय
- ग्रहण से पहले घर की उत्तर दिशा में एक लोटा साफ पानी भरकर रख दें और अगले दिन उसे किसी पौधे में अर्पित कर दें. इसे शुद्धिकरण का प्रतीक माना जाता है.
- घर के बाहर चींटियों को आटा और पिसी चीनी डालना, जरूरतमंद लोगों या सेवा प्रदाताओं जैसे नौकरानी, ड्राइवर, रसोइया, सफाईकर्मी आदि को भोजन या उपहार देना भी सकारात्मक कर्मों से जुड़ा माना जाता है. ये छोटे कार्य रिश्तों में मधुरता और घर में शुभ ऊर्जा लाते हैं.
स्वास्थ्य और आध्यात्मिक शुद्धि के उपाय
- 4–5 काली मिर्च रातभर पानी में भिगो दें और अगली सुबह यह पानी पी लें. पारंपरिक रूप से शरीर शुद्धि और आभामंडल (Aura) से जोड़ा जाता है.
- ग्रहण के बाद शिवलिंग पर जल अर्पित करना और दूध से स्नान कर सामान्य स्नान करना भी आध्यात्मिक शुद्धि का प्रतीक माना जाता है.
पशु सेवा और संसाधनों का सम्मान
- ग्रहण काल में पशुओं को भोजन कराना पुण्य कार्य माना जाता है. साथ ही दूध और पानी जैसी आवश्यक वस्तुओं की बर्बादी से बचने की सलाह दी जाती है, क्योंकि इन्हें समृद्धि और संतुलन का प्रतीक माना गया है.
- चंद्र ग्रहण से जुड़े ये सभी उपाय आस्था पर आधारित हैं. हालांकि इनका मूल संदेश साफ-सफाई, संयम, करुणा और सकारात्मक सोच को बढ़ावा देना है. यदि इन बातों का पालन किया जाए तो ग्रहण का समय भी आत्मचिंतन और ऊर्जा संतुलन का अवसर बन सकता है.
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