सावन शिवरात्रि कब? जानिए जलाभिषेक का खास दिन, शुभ मुहूर्त और महत्व

Sawan shivratri 2026: हिंदू धर्म में सावन के महीने का विशेष महत्व है. यही वजह है इस पर्व को पूरे देश में इस महीने में भगवान शिव की पूजा के लिए मंदिरों में जलाभिषेक और रुद्राभिषेक किया जाता है. सावन के महीने में सावन शिवरात्रि का खास महत्व है. इस दिन भगवान शंकर और मां पार्वती की विशेष पूजा की जाती है. भक्त दही, दूध घी, जल , शहद और गंगाजल से भगवान शिव का अभिषेक कर आशीर्वाद मांगते हैं.

सावन शिवरात्रि तिथि 2026

सावन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 11 अगस्त 2026 को सुबह 4.54 पर शुरू होगी और अगले दिन 12 अगस्त को सुबह 1.52 पर समाप्त होगी. इसी दिन कांवड़िए शिव जी पर जल चढ़ाते हैं और कांवड़ यात्रा का समापन होता है.

सावन शिवरात्रि पर जल चढ़ाने का मुहूर्त

निशिता काल पूजा समय – सुबह 12:05 – सुबह 12:48, 12 अगस्त

सावन शिवरात्रि पर चार प्रहर मुहूर्त
  • प्रथम प्रहर पूजा मुहूर्त – शाम 07:04 – रात 09:45
  • दूसरा प्रहर पूजा मुहूर्त -रात  09:45 – देर रात 12:26
  • तीसरा प्रहर पूजा मुहूर्त – देर रात 12:26 – सुबह 03:07
  • चौथा प्रहर पूजा मुहूर्त – सुबह 03:07 – सुबह 05:49
पूजा विधि

सावन शिवरात्रि का अनुष्ठान एक दिन पूर्व शुरू हो जाता है, जिसमें भक्त त्रयोदशी पर केवल एक बार भोजन करते हैं. शिवरात्रि पर वे व्रत रखते हैं और आध्यात्मिक रूप से केंद्रित रहने का संकल्प लेते हैं.

साथ ही भगवान शिव की रात भर की पूजा शुरू करने से पूर्व भक्त दो बार स्नान करते हैं, एक बार सुबह और दूसरी बार शाम को. वहीं शिवलिंग पर दूध, बेलपत्र, शहद और गंगाजल चढ़ाया जाता है, जबकि प्रार्थना और मंत्र के उच्चारण आधी रात या उसके बाद तक जारी रहते हैं. भक्त अगले दिन सूर्योदय के बाद और चतुर्दशी तिथि खत्म होने से पूर्व अपना व्रत तोड़ते हैं, हालांकि कुछ लोग तिथि समाप्त होने तक इंतजार करते हैं.

सावन शिवरात्रि का व्रत कैसे रखें?

उपवास और पूजा:सावन शिवरात्रि के दिन उपवास रखना अत्यंत महत्वपूर्ण है. उपवास में भक्त एक ही व्रत के दौरान सभी अन्न, धन, और विषयों से बाहर रहते हैं और शिव पूजा में लगे रहते हैं. प्रात: स्नान के बाद, शिवलिंग को गंगाजल से स्नान कराएं और विशेष रूप से दिया जलाएं.

मंत्र और आराधना: व्रत के दिन शिव मंत्रों का जाप करना और ध्यान में रहना अत्यंत महत्वपूर्ण है. “ॐ नमः शिवाय” और “महामृत्युंजय मंत्र” का पाठ करना व्रती को भगवान के साथ एकाग्रचित्त होने में मदद करता है.

व्रत का खास भोग: शिवरात्रि के दिन व्रती बिल्व पत्र, दूध, धूप, गंध, अक्षता, और फलों को शिवलिंग पर अर्पित करते हैं. इससे भगवान को प्रसन्नता होती है और भक्त को आशीर्वाद प्राप्त होता है.

सावन शिवरात्रि व्रत में क्या खाएं?

फल:सावन शिवरात्रि व्रत में फलों का सेवन करना अत्यंत उपयुक्त है. शिव भगवान को खुश करने के लिए बनाए गए फलों का विशेष महत्व है. आम, केला, अंगूर, और सेब व्रत के दिन खाये जा सकते हैं.

दूध और दही:शिव जी को चंदन, गंध, और बिल्व पत्र से प्रसन्न करने के लिए दूध और दही का सेवन करना भी शुभ होता है. यह आपको विशेष आनंद और शांति प्रदान करता है.

बिल्व पत्र:शिवरात्रि के दिन व्रती बिल्व पत्र, दूध, धूप, गंध, अक्षता, और फलों को शिवलिंग पर अर्पित करते हैं. इससे भगवान को प्रसन्नता होती है और भक्त को आशीर्वाद प्राप्त होता है.

खीर:खीर शिव भगवान की प्रिय भोग मानी जाती है और सावन शिवरात्रि में इसे बनाकर पूजा करना शुभ होता है. खीर से भगवान की कृपा मिलती है और व्रती को सफलता प्राप्त होती है.

सावन का पुराणों में महत्व

भगवान शिव कहते हैं कि, सभी महीनों में मुझे श्रावण अत्यंत प्रिय है इसकी महिमा सुनने योग्य ह. इसलिए इसे श्रावण कहा जाता है. इस महीने में पूर्णिमा पर श्रवण नक्षत्र होता है इस कारण भी इसे श्रावण कहा जाता है. इस महीने की महिमा को सुनने से ही सिद्धि मिलती है, इसलिए भी इसे श्रावण कहा गया है.

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