Indian Himalayas: भारत की धरती सिर्फ खूबसूरत नज़ारों से ही नहीं बल्कि अनगिनत अनोखे जीवों से भी भरी हुई है. कई बार हम सोचते हैं कि हमें अपनी देश की प्रकृति के बारे में सब पता है, लेकिन सच यह है कि यहां ऐसे जीव भी रहते हैं जिनके बारे में हम कभी सुनते तक नहीं. पहाड़ों की बर्फ से लेकर गहरे जंगलों की नमी तक, हर कोने में कोई न कोई अनदेखा चमत्कार छिपा हुआ है. बर्फ से ढकी पर्वत श्रृंखलाओं से, जहाँ शीर्ष शिकारी रहते हैं, लेकर जंगलों तक, जहाँ जीव-जंतु काई से ढके घने आवरणों में घुलमिल जाते हैं, ये जानवर हिमालय के ‘जंगली’ स्वरूप का प्रतीक हैं. यहाँ 6 ऐसी प्रजातियाँ हैं जो भारतीय हिमालय को दुनिया के सबसे आकर्षक वन्यजीव स्थलों में से एक बनाती हैं.
हिम तेंदुआ
स्नो लेपर्ड को पहाड़ों का भूत भी कहा जाता है. यह हिमालय का सबसे प्रसिद्ध शिकारी जानवर है. बर्फीले इलाको में रहने के लिए इसकी मोटी फर, बड़ें पंजे और लंबी पूंछ इसे खास बनाती है. स्नो लेपर्ड लद्दाख, हिमाचल और उत्तराखंड के ऊंचे इलाकों में पाए जाते हैं. ये अकेले रहने वाले जानवर होते हैं और बहुत कम दिखाई देते हैं.
हिमालयी मोनाल
वहीं हिमालयन मोनाल उत्तराखंड का राज्य पक्षी हे और दुनिया के सबसे खूबसूरत पक्षियों गिना जाता है. इसके पंखों में हरे, नीले, तांबे और सुनहरे रंग की चमक होती है, जो पहाड़ी जंगलों में बहुत आकर्षक लगती है. यह पक्षी 2,400 से 4,500 मीटर की ऊंचाई पर ओक, देवदार और रोडोडेंड्रॉन के जंगलों में रहता है.
लाल चीन की भालू
रेड पांडा न तो भालू होता है और न ही जायंट पांडा का करीबी रिश्तेदार होता है. यह एक छोटा, पेड़ों पर रहने वाला स्तनधारी जीव है, जो खासतौर पर सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश के ठंडे, बांस से भरे जंगलों में पाया जाता है. इसकी लाल भूरी फर और झबरीली पूंछ इसे अलग पहचान देती है. वहीं रेड पांडा शर्मीला और ज्यादातर रात में सक्रिय रहने वाला जानवर है.
हिमालयी तहर
हिमालयन ताहर एक मजबूत पहाड़ी जानवर है, जो खड़ी और पथरीली ढलानों पर आसानी से चल सकता है. इसके शरीर पर घनी फर और खास तौर पर नर ताहर की मोटी अयाल इसकी पहचान होती है. यह उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के ऊंचाई वाले घास के मैदानों और चट्टानी इलाकों में पाया जाता है. ताहर अक्सर झुंड में ही देखे जाते हैं.
हिमालयी कस्तूरी मृग
हिमालयन मस्क डियर एक शांत और कम दिखाई देने वाला जानवर है. यह घने अल्पाइन जंगलों और झाड़ियों वाले इलाकों में रहता है. वहीं नर मस्क डियर में मौजूद मस्क ग्रंथि इसे खास बनाती है, जिसका इस्तेमाल लंबे समय से इत्र बनाने में होता आया है. दूसरे हिरणों से अलग इनमें सींग नहीं होते बल्कि नुकीले दांत होते हैं.
हिमालयी भेड़िया
हिमालयी भेड़िया दुनिया के सबसे अलग जेनेटीकली भेड़ियों में से एक है. यह कठोर ठंड और ऊंचे पहाड़ी इलाकों में रहने के लिए खास रूप से तैयार रहता है. इसकी प्राचीन वंश रेखा हमें यह दिखाती है कि एक ही प्रजाति में कितनी विविधता होती है. ऐसे खास जीवों को बचाना जरूरी है ताकि ऊंचाई वाले नाज़ुक इलाकों की प्रकृति सुरक्षित रह सके.
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