Religion: हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन विशेष रूप से भगवान शिव की पूजा कि जाती है। यह व्रत किसी भी महीने के शुक्ल और कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को होता है, लेकिन इसका अनुमान प्रदोष काल से लगाया जाता है। उसका नाम उसी वार के हिसाब से रखा जाता है। सितंबर का पहला प्रदोष व्रत मंगलवार को पड़ेगा इसलिए इसे भौम प्रदोष कहा जाएगा। जानिए प्रदोष व्रत का शुभ मुहूर्त।
भौम प्रदोष व्रत शुभ मुहूर्त
पंचाग के अनुसार प्रदोष पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 6 बजकर 47 मिनट से रात 9 बजकर 7 मिनट तक रहेगा। प्रदोष काल का समय भगवान शिव की पूजा के लिए अति उत्तम माना जाता है। प्रदोष व्रत के दिन ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 52 मिनट से सुबह 5 बजकर 38 मिनट तक रहेगा। अभिजित मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 11 मिनट से दोपहर 1 बजकर 1 मिनट तक रहेगा।
भौम प्रदोष व्रत का महत्व
बता दें कि मंगल का एक नाम भौम भी है। मंगल का सीधा संबंध कर्ज से है। अतः यह भौम प्रदोष व्रत का दिन कर्ज से मुक्ति पाने के लिये बहुत ही श्रेष्ठ है। इस दिन मंगल से संबंधित चीज़ें गुड़, मसूर की दाल, लाल वस्त्र, तांबा आदि का दान करने से सौ गौ दान के समान फल मिलता है। वहीं मान्यता है कि त्रयोदशी तिथि की रात के पहले प्रहर में जो व्यक्ति किसी भेंट के साथ शिव प्रतिमा के दर्शन करता है उसपर भगवान शिव की कृपा सदैव बनी रहती है। जो व्यक्ति भौम प्रदोष व्रत करता है, भगवान शिव एवं मंगल देव की कृपा से उसे साहस, आत्मबल और निर्भयता प्राप्त होती है।
यह व्रत आर्थिक बाधाओं से मुक्ति प्रदान करता है और विभिन्न प्रकार की शारीरिक परेशानियों को भी दूर करता है। हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन विशेष रूप से भगवान शिव की पूजा कि जाती है। यह व्रत किसी भी महीने के शुक्ल और कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को होता है, लेकिन इसका अनुमान प्रदोष काल से लगाया जाता है। उसका नाम उसी वार के हिसाब से रखा जाता है। सितंबर का पहला प्रदोष व्रत मंगलवार को पड़ेगा इसलिए इसे भौम प्रदोष कहा जाएगा। जानिए प्रदोष व्रत का शुभ मुहूर्त।