Mahalakshmi Vrat 2026: सनातन धर्म में महालक्ष्मी व्रत का बहुत खास और पवित्र माना जाता है. इस दौरान श्रद्धालु नियम और श्रद्धा के साथ मां लक्ष्मी की पूजा करते हैं और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना करते हैं. अगर आप भी इस साल महालक्ष्मी व्रत रखने जा रहे हैं, तो इसकी शुरुआत और समापन की तारीख के साथ पूजा की विधि, व्रत के दौरान रखे जाने वाले नियम और उद्यापन की पूरी जानकारी जानना जरूरी है.
कब से शुरू होगा महालक्ष्मी व्रत?
महालक्ष्मी व्रत भाद्रपद शुक्ल अष्टमी से शुरू होता है. साल 2026 में इसकी शुरुआत 19 सितंबर, शनिवार से हो रही है और इसका समापन 3 अक्टूबर को होगा. अष्टमी तिथि 18 सितंबर की दोपहर से शुरू होकर 19 सितंबर की दोपहर तक रहेगी. ऐसे में उदया तिथि के आधार पर महालक्ष्मी व्रत की शुरुआत 19 सितंबर से मानी जाएगी. महालक्ष्मी व्रत को 16 दिवसीय व्रत माना जाता है.
महालक्ष्मी की पूजा विधि
- सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ वस्त्र पहनें. पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके आसन पर बैठें.
- एक साफ चौकी पर लाल या पीला वस्त्र बिछाएं. उस पर थोड़े से चावल रखें.
- चावल के ऊपर जल से भरा कलश रखें. कलश के कंठ पर कलावा बांधें. उसमें हल्दी, सुपारी, सिक्का और आम के पांच पत्ते रखें.
- कलश के ऊपर चावल से भरी प्लेट रखें. उस पर कलावा बंधा हुआ नारियल रखें. माता महालक्ष्मी की मूर्ति या तस्वीर को चौकी पर स्थापित करें.
- माता को तिलक लगाएं. साबुत अक्षत, लाल फूल और दुर्वा घास अर्पित करें. इसके बाद श्रृंगार सामग्री और फलों-मिठाइयों का भोग लगाएं.
- घी का दीपक और धूप जलाएं. कमल या माला से इस मंत्र का जाप करें:ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः
- पूजा के अंत में माता महालक्ष्मी की आरती करें. पूजा में हुई भूल के लिए क्षमा प्रार्थना करें.
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