Kisan Credit Card: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) योजना के मानदंडों में अहम बदलाव किया है. इसके तहत लोन मंजूर करने और चुकाने के कार्यक्रमों में एकरूपता लाने के मकसद से फसल सीजन की परिभाषा को एक जैसा किया गया है. आरबीआई (वाणिज्यिक बैंक–केसीसी योजना) निर्देश 2026 अगले साल जनवरी से लागू होंगे. केंद्रीय बैंक ने कहा कि ये निर्देश केसीसी योजना के तहत बैंक प्रणाली से पर्याप्त और समय पर लोन सहायता की रूपरेखा तैयार करने के लिए जारी किए जा रहे हैं.
किसान क्रेडिट कार्ड के प्रमुख बदलाव इस प्रकार हैं
- फसल सीजन की नई परिभाषा: आरबीआई ने कृषि ऋणों (IRAC) मानदंडों के अनुरूप फसल मौसम को मानकीकृत किया है. इसके अनुसार अल्पकालिक (Short-term) फसलों के लिए सीजन 12 महीने का और दीर्घकालिक (Long-term) फसलों के लिए 18 महीने का होगा. बुवाई से लेकर कटाई और मार्केटिंग तक इसी अवधि को आधार माना जाएगा.
- बिना गारंटी (Collateral-free) लोन की सीमा: आरबीआई ने बिना गारंटी वाले कृषि ऋण की सीमा को ₹2 लाख प्रति उधारकर्ता तक ही सीमित रखा है.
- गारंटी और मार्जिन में छूट: बैंकों को प्रति उधारकर्ता ₹2 लाख तक के कृषि लोन (जिसमें संबद्ध गतिविधियां भी शामिल हैं) के लिए गारंटी और मार्जिन सुरक्षा को खत्म करने के निर्देश दिए गए हैं. हालांकि, यदि लोन फसल/स्टॉक गिरवी रखकर लिया जाता है, तो बैंकों के पास ₹3 लाख तक के लोन के लिए संपत्ति गिरवी रखने की शर्त में छूट देने का विकल्प है.
- लागू होने की तिथि: यह संशोधित ढांचा और नए नियम जनवरी 2027 से स्वीकृत होने वाले लोन पर पूर्णतः लागू होंगे, जबकि इससे पहले के लोन मौजूदा दिशा-निर्देशों के तहत चलते रहेंगे.
- विस्तृत आधिकारिक दिशानिर्देशों के लिए आप RBI की आधिकारिक वेबसाइट या अपने नज़दीकी बैंक की शाखा से संपर्क कर सकते हैं.
क्या है केसीसी योजना
किसानों के लिए साल 1998 में केसीसी योजना की शुरुआत की गई थी. इसके तहत 2 से 3 लाख का कर्ज आसानी से मिल जाता है. वैसे तो केसीसी के तहत किसानों को 7 फीसदी ब्याज पर कर्ज दिया जाता है, लेकिन समय पर लोन चुकाने वालों को सरकार की तरफ से 3 फीसदी की ब्याज सब्सिडी मिल जाती है, जिससे प्रभावी ब्याज दर महज 4 फीसदी रहती है. केसीसी के तहत बीज खरीदने से लेकर फसल कटाई तक किसी भी काम के लिए कर्ज उठाया जा सकता है.
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