पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना में गुजरात अव्वल,  26 लाख परिवारों को मिला लाभ

Solar Power: पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत गुजरात सबसे ज्यादा लाभ पाने वाला राज्य बन गया है. यहां लाखों परिवारों ने अपने घरों में सोलर सिस्टम लगवाया है. इसके बाद महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश का नंबर आता है, जहां बड़ी संख्या में लोगों ने इस योजना का लाभ लिया है. इससे साफ है कि अलग-अलग राज्यों में लोग अब सौर ऊर्जा को अपनाने के लिए आगे आ रहे हैं राज्यसभा में एक लिखित जवाब के दौरान केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा राज्य मंत्री श्रीपाद येसो नाईक ने इस योजना की प्रगति की जानकारी साझा की..

20 लाख से ज्यादा घरों की छतों पर लगे सोलर पैनल

फरवरी 2024 में शुरू हुई इस योजना ने बेहद कम समय में बड़ी उपलब्धि हासिल की है. आंकड़ों के अनुसार, अब तक पूरे देश में कुल 20,85,514 रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाए जा चुके हैं. इस योजना का मुख्य उद्देश्य लोगों को खुद की बिजली पैदा करने के लिए प्रोत्साहित करना है ताकि उन्हें बिजली बिल से छुटकारा मिल सके.

सरकार ने दी 14,771 करोड़ रुपये की सब्सिडी

योजना को सफल बनाने के लिए सरकार की ओर से बड़ी आर्थिक मदद भी दी जा रही है. रिपोर्ट के मुताबिक, दिसंबर 2025 तक लाभार्थियों को कुल 14,771.82 करोड़ रुपये की केंद्रीय वित्तीय सहायता यानी सब्सिडी के रूप में बांटी गई है. यह राशि सीधे उन लोगों को दी गई है जिन्होंने योजना के नेशनल पोर्टल पर आवेदन कर अपने घरों में सोलर सिस्टम लगवाया है.

गुजरात नंबर-1, यूपी और महाराष्ट्र भी रेस में आगे

सोलर पैनल लगाने के मामले में राज्यों के प्रदर्शन पर नजर डालें तो गुजरात सबसे टॉप पर है. गुजरात में 5,15,052 सोलर सिस्टम लगाए गए हैं, जिससे 7.41 लाख परिवारों को फायदा हुआ है. महाराष्ट्र 3,91,887 इंस्टॉलेशन के साथ दूसरे नंबर पर है. उत्तर प्रदेश 3,26,386 सोलर सिस्टम के साथ तीसरे स्थान पर अपनी जगह बनाए हुए है. केरल, राजस्थान और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में भी इस योजना को लेकर भारी उत्साह देखा जा रहा है.

पर्यावरण को भी होगा बड़ा फायदा

सरकार का लक्ष्य इस योजना के तहत 1 करोड़ घरों को कवर करना है. अनुमान है कि जब 1 करोड़ घरों में ये सोलर सिस्टम लग जाएंगे, तो अगले 25 वर्षों में करीब 720 मिलियन टन कार्बन उत्सर्जन को कम करने में मदद मिलेगी. साथ ही इससे लगभग 1,000 बिलियन यूनिट रिन्यूएबल बिजली पैदा होगी.

यह एक मांग आधारित योजना है. देश का कोई भी आवासीय उपभोक्ता, जिसके पास बिजली का ग्रिड कनेक्शन है, वह योजना के नेशनल पोर्टल पर जाकर आवेदन कर सकता है और अपने घर की छत पर सोलर सिस्टम लगवाकर इस सरकारी सब्सिडी का लाभ उठा सकता है.

85,800 रुपये तक की सब्सिडी से सोलर हुआ सस्ता

एनर्जी एक्सपर्ट्स के मुताबिक एक किलोवाट क्षमता का सोलर प्लांट हर महीने औसतन करीब 100 यूनिट बिजली पैदा कर सकता है. यह मात्रा एक सामान्य परिवार की महीने भर की बिजली जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त मानी जाती है.

कार्बन उत्सर्जन में बड़ी कटौती का अनुमान

मंत्रालय के अनुसार, अगर इस योजना के तहत 1 करोड़ घरों में रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाए जाते हैं तो करीब 1,000 बिलियन यूनिट नवीकरणीय बिजली का उत्पादन संभव होगा. इससे आरटीएस सिस्टम के 25 साल के जीवनकाल में लगभग 720 मिलियन टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी आ सकती है.

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