Lifestyle: आज की तेज रफ्तार जिंदगी में काम का दबाव, लगातार तनाव और कई तरह की जिम्मेदारियों के बीच मन को शांत रखना आसान नहीं है। ऐसे में योग और प्राणायाम मानसिक सुकून पाने का एक आसान तरीका हो सकता है। भ्रामरी प्राणायाम ऐसी ही सरल तकनीक है, जिसके नियमित अभ्यास से मन को शांत रखने, तनाव कम करने और एकाग्रता बढ़ाने में मदद मिल सकती है। भ्रामरी प्राणायाम का नाम भौंरे से जुड़ा है। इसका अभ्यास करते समय सांस छोड़ने के दौरान गुनगुनाहट जैसी आवाज निकाली जाती है, जो भौंरे की आवाज के समान होती है। इसी वजह से इसे भ्रामरी प्राणायाम कहा जाता है।
कैसे करें भ्रामरी प्राणायाम
बता दें कि भ्रामरी प्राणायाम करने के लिए सबसे पहले किसी शांत और हवादार जगह पर आराम से बैठ जाएं। जिसके बाद आप पद्मासन, सुखासन या किसी भी ऐसी स्थिति में बैठ सकते हैं जिसमें शरीर को ज्यादा परेशानी न हो। सबसे पहले अपनी आंखें बंद करके शरीर को ढीला छोड़ें और सामान्य रूप से सांस लें।
अब दोनों हाथों को चेहरे के पास लाएं और अंगूठों से कानों के बाहरी हिस्से को हल्के से बंद करें। फिर अपनी बाकी उंगलियों को आंखों और माथे के आसपास आराम से रखें। आंखों पर किसी तरह का दबाव न डालें। अब नाक से धीरे-धीरे गहरी सांस लें। सांस छोड़ते समय मुंह बंद रखें और गले से ‘म…’ जैसी धीमी गुनगुनाहट निकालें। इस दौरान अपनी आवाज और सांस पर ध्यान केंद्रित करने की कोशिश करें। सांस पूरी तरह बाहर निकलने के बाद दोबारा धीरे से सांस लें और इसी प्रक्रिया को दोहराएं। भ्रामरी करते समय आवाज को बहुत तेज करने या सांस को जबरदस्ती रोकने की जरूरत नहीं है। अभ्यास आराम से और अपनी क्षमता के अनुसार करना चाहिए।
मन को शांत करने में मददगार है प्राणायाम
जानकारी के अनुसार, भ्रामरी प्राणायाम दिमाग को शांत करने में मदद कर सकता है। इसके अभ्यास से तनाव और मानसिक बेचैनी को कम करने में मदद मिलती है। गुस्से को नियंत्रित करने और मन को स्थिर रखने में भी इसका अभ्यास उपयोगी माना जाता है। नियमित अभ्यास के दौरान सांस और गुनगुनाहट पर ध्यान लगाने से एकाग्रता बढ़ाने में मदद मिल सकती है। इससे मानसिक थकान कम करने और शरीर व दिमाग को आराम देने में भी सहायता मिल सकती है।