Technology: दुनियाभर में नकली प्रोडक्ट्स की हजारों करोड़ रुपये की मार्केट है और इसका साइज कुल ग्लोबल ट्रेड का लगभग 2 प्रतिशत है. नकली प्रोडक्ट्स के कारण कंपनियों के साथ-साथ ग्राहकों को भी भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है. दूसरी तरफ नकली प्रोडक्ट्स बनाने वाले लगातार एडवांस होते जा रहे हैं और अब ऐसे सामान को पहचान पाना काफी मुश्किल हो गया है. इस कारण कंपनियां महंगी कीमत वाले ऑथेंटिकेशन सिस्टम पर डिपेंड रहती हैं.
मजबूत और टिकाऊ: नैनो-टेक्नोलॉजी और विशेष पॉलिमर कैप्सूल के इस्तेमाल से ये लेबल अत्यधिक गर्म या आर्द्र (humid) परिस्थितियों में भी स्थिर और मजबूत रहते हैं.
बड़े पैमाने पर उत्पादन: यह तकनीक हाई-स्पीड स्क्रीन और इंक जेट प्रिंटिंग के साथ आसानी से काम करती है, जिससे इन्हें बड़ी संख्या में कम लागत पर तैयार करना संभव होता है.
स्मार्टफोन से जाँच: रिस्पॉन्सिव लेबल्स के साथ प्रकाश की प्रतिक्रिया को मापकर और मशीन लर्निंग की मदद से लेबल के मूल होने की पुष्टि लगभग 97.5% सटीकता के साथ की जा सकती है.
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