मनुष्य सदगुणों से बनता है महान: दिव्य मोरारी बापू 

Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा कि प्रभु श्री राम चारों भाइयों का नामकरण संस्कार, बाललीला, गृह निष्क्रमण, अन्नप्राशन,चूंड़ाकरण यज्ञोपवीत एवं विद्याध्ययन संस्कार का वर्णन किया गया। व्यक्ति जन्म से महान नहीं होता, माता-पिता गुरुजन उसे दिव्य संस्कारों से सुसंस्कृत करते हैं, जिससे आगे चलकर वह महान बनता है।

बच्चों की प्रथम गुरु मां होती है। न हि गंगा समं तीर्थं न हि मातृ समोगुरुः। बच्चे बनते बिगड़ते हैं मां से। अगर बनते हैं तो मां की सावधानी और बिगड़ते हैं तो मां की असावधानी ही मुख्य रूप से कारण है। छोटे बच्चे अधिक समय मां के पास होते हैं, इसलिए मां को बहुत सावधान होकर उनमें अच्छे संस्कार का सृजन करना चाहिए। बचपन में जो संस्कार पड़ जाते हैं वे ऐसे पक्के हो जाते हैं कि जीवन भर बने रहते हैं। द्वितीय गुरु पिता होता है। बंदउँ प्रथम गुरू पितु माता। जे एहि नर तन केरि विधाता।

तृतीय गुरु परिवार, चतुर्थ गुरु पड़ोस, पंचम गुरु समाज,षष्टम् गुरु राष्ट्र और वहां की संस्कृति, सप्तम गुरु  शिक्षण संस्था अर्थात् विद्यालय हैं। अगर एक पत्ता पीला होकर पेड़ से गिर जाता है तो उसमें केवल पत्ता ही दोषी है ऐसा नहीं है। जड़ों ने वहां तक जल पहुंचना बन्द कर दिया, तना ने वहां तक पोषक तत्व पहुंचना बन्द कर दिया और डालों ने उस पत्ते को संभाला नहीं और पत्ता पीला हो करके जमीन पर गिर गया।

इसी तरह अगर हमारे बच्चों में कोई दोष दिखाई पड़ता है तो उसके लिए केवल बच्चे ही दोषी हैं ऐसा नहीं माता-पिता,परिवार,समाज शिक्षण संस्थाएं पूरी व्यवस्था दोषी है। वकील की भूल फाइलों में दब जाती है, डॉक्टर की भूल श्मशान में दब जाती है लेकिन बच्चों में अगर हम लोगों ने संस्कार देने में कमी रखा तो वह भूल कहीं छुपने वाली नहीं है, 10 वर्ष बाद चौराहे पर दिखाई पड़ेगी। फिर हम कहेंगे हमारे बच्चों में ऐसा दोष कहां से आया। इसलिए माता-पिता, परिवार समाज और पूरी व्यवस्था को बहुत सावधान होने की आवश्यकता है। क्योंकि बच्चे ही परिवार,समाज,राष्ट्र और विश्व के भविष्य हैं।

भगवान श्री राम चारों भाई गुरुदेव वशिष्ठ के गुरुकुल में विद्याध्ययन करते हैं। अयोध्या धाम में विश्वामित्र जी का आगमन, यज्ञरक्षा के लिए राम लक्ष्मण की याचना, भगवान श्री राम के द्वारा श्री विश्वामित्र जी महाराज के यज्ञ की रक्षा, श्रीधाम जनकपुर जाते समय मार्ग में चरण धूल से अहिल्या जी का उद्धार आदि कथा का वर्णन किया गया। कल की कथा में नगर दर्शन लीला,पुष्प वाटिका, धनुष भंग, परशुराम संवाद और श्री सीताराम जी के विवाह की कथा होगी।

सभी हरि भक्तों को पुष्कर आश्रम एवं गोवर्धनधाम आश्रम से साधु संतों की शुभ मंगल कामना, श्री दिव्य घनश्याम धाम, श्री गोवर्धन धाम कॉलोनी, बड़ी परिक्रमा मार्ग, दानघाटी, गोवर्धन, जिला-मथुरा, (उत्तर-प्रदेश) दिव्य मोरारी बापू धाम सेवा ट्रस्ट, गनाहेड़ा, पुष्कर जिला-अजमेर (राजस्थान).

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *