धर्म-कर्म, पूजा-पाठ, दान-पुण्य है विशिष्ट कर्म: दिव्य मोरारी बापू

Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा कि भगवान् की कथा-श्रवण का अद्भुत प्रभाव अब तक क्यों नहीं व्यक्त हो पाया? कथा सुनने में लाभ ही लाभ है। कथा का अर्थ है- भगवान् की कथा, जगत की कथा नहीं। किन्तु हम-सबमें भगवान की कथा का अद्भुत प्रभाव अब तक क्यों नहीं व्यक्त हो पाया, इतने दिन हम सबको सत्संग करते हो गये, हम-सबका जीवन भगवान से क्यों नहीं भर गया। इस सम्बन्ध में कुछ बातें शिव महापुराण में बताई गयी हैं।

कलियुग के प्रभाव से मन की मलिनता ही साधना पक्ष में सबसे बड़ी बाधा है। धर्मशास्त्रों में लिखा है कि – कलियुग में चार गुना पूजा करने से सम्पूर्ण फल की प्राप्ति होती है। अन्य युगों में एक पुरश्चरण करने से ही भगवान का दर्शन हो जाता है। कलियुग में वही फल चार पुरश्चरण करने से प्राप्त होता है। अगर कोई भक्त निरन्तर उपासना आराधना करता रहेगा तो जीवन से मलिनता भी दूर होगी और जीवन में भजन साधन का फल अवश्य प्राप्त होगा। हम सबने आज तक जो पूजा-आराधना किया है, कुछ भी व्यर्थ नहीं हुआ है समय आने पर सबका फल मिलने वाला है। प्रत्येक कर्म व्यक्ति को फल प्रदान करता है। धर्म-कर्म, सत्संग, पूजा-पाठ, दान-पुण्य विशिष्ट कर्म है इसका फल भी विशिष्ट ही होता है।

अहो हरि! वे हू दिन कब ऐ हैं। संग करत नित हरि भगतन की, हम नहिं नेकु अघैहैं। सुनत श्रवण हरि कथा सुधा-रस, महामत्त ह्वै जैहैं।।

श्रवण-भक्ति÷ कथा में श्रवण किए हुए को आचरण में उतारो तो ही उसकी सार्थकता है। श्रवण-भक्ति से पाप जलते हैं, मन का मैल धुलता है और प्रभु का प्रेम जागृत होता है। कथा सुनने के बाद जीवन में परिवर्तन आना चाहिए। कथा का श्रवण पुण्य प्राप्त करने के लिए नहीं, दुर्वृति की समाप्ति के लिए करो। जीवन में सुधार लाने के लिए ही कथा सुनो। यदि कथा सुनने के बाद जीवन में नई चेतना न आए और नए जीवन की शुरुआत न हो तो मानो हमने ठीक से कथा नहीं श्रवण किया है। जगत की व्यथा को दूर रखकर ही कथा में बैठें, कथा में सुने हुए को क्रिया में उतरें तो ही वह काम का है।

सभी हरि भक्तों को पुष्कर आश्रम एवं गोवर्धनधाम आश्रम से साधु संतों की शुभ मंगल कामना, श्री दिव्य घनश्याम धाम, श्री गोवर्धन धाम कॉलोनी, बड़ी परिक्रमा मार्ग, दानघाटी, गोवर्धन, जिला-मथुरा, (उत्तर-प्रदेश) दिव्य मोरारी बापू धाम सेवा ट्रस्ट, गनाहेड़ा, पुष्कर जिला-अजमेर (राजस्थान).

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