308 पहियों वाला ‘बाहुबली ट्रक’ आखिर मंजिल पर पहुंचा, बेल्जियम से आई मशीन की यात्रा बनी चर्चा का विषय

Belgium Vessel News : बेल्जियम से चली एक विशाल मशीन ने आखिरकार अपनी मंजिल तय कर ली है, लेकिन इस मशीन का सफर इतना रोचक था कि लोग इसे लंबे समय तक नहीं भूलेंगे। 308 पहियों वाले विशाल ट्रेलर पर लदे इस उपकरण को लाने के लिए रास्ते में पेड़ काटने पड़े, बिजली के पोल हटाने पड़े और तो और कैमूर में एक पुल को भी अस्थायी तौर पर तोड़ना पड़ा।सफर इतना मुश्किल था कि खुद ट्रक भी थक गया। मोड़ पर मुड़ने में दिक्कत के कारण इसके 58 पहिए निकालने पड़े और आखिर में 250 पहियों के सहारे ही यह 200 टन वजनी वेसल आगे बढ़ पाया।

समुद्र से सड़क तक का सफर

यह 41 मीटर लंबा और 180-200 टन वजनी रिएक्टर बेल्जियम से समुद्री जहाज से ओडिशा के पारादीप पोर्ट लाया गया था। वहां से झारखंड, बिहार के रास्ते होते हुए उत्तर प्रदेश में दाखिल हुआ। शनिवार सुबह यह बलरामपुर चीनी मिल की केमिकल डिवीजन यूनिट में पहुंचा।सुरक्षा के चलते इस ट्रेलर को दिन में सिर्फ 10-20 किलोमीटर ही चलाया जाता था और रात में रोक दिया जाता था। आगे-आगे 2 पायलट गाड़ियां, क्रेन, JCB और एक्सपर्ट की 14 गाड़ियों का काफिला चल रहा था। रफ्तार सिर्फ 5-8 KM प्रति घंटा।

क्यों है इतनी खास ये मशीन?

यह रिएक्टर लखीमपुर खीरी के गोला गोकर्णनाथ स्थित कुंभी चीनी मिल में लगने वाले देश के पहले बायोपॉलिमर प्लांट के लिए लाया गया है।• लागत: करीब 3080 करोड़ रुपये• क्षमता: सालाना 80 हजार टन बायोपॉलिमर (PLA)• खासियत: भारत का पहला और दुनिया का चौथा ऐसा इंटीग्रेटेड प्लांट, जहां गन्ने से ही चीनी से PLA बनाया जाएगा।कंपनी के मैनेजर आशीष प्रताप सिंह के मुताबिक PLA से बोतल, कप, प्लेट, खाने के डिब्बे और पैकेजिंग का सामान बनेगा। यह पेट्रोलियम वाले प्लास्टिक का जैव-विकल्प होगा।यह प्लांट अक्टूबर 2026 में शुरू होना है और नवंबर से कमर्शियल प्रोडक्शन शुरू होने की उम्मीद है।

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