Vitamin D: आजकल की भागदौड़ भरी लाइफस्लाइल की वजह से लोगों में विटामिन-डी की कमी काफी ज्यादा होने लगी है। विटामिन-डी हड्डियों को स्वस्थ रखने, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने और सेहतमंद रखने में मदद करता है। आमतौर पर विटामिन की कमी (Vitamin Deficiency) को पूरी करने के लिए खानपान में ऐसी चीजें शामिल की जाती हैं जिनसे शरीर को भरपूर विटामिन मिल सके। लेकिन, खानपान से विटामिन की कमी पूरी नहीं होती है तो इस कमी को पूरी करने और पर्याप्त मात्रा में विटामिन पाने के लिए विटामिन की कैप्सूल्य या अन्य सप्लीमेंट्स लिए जाते हैं।
विटामिन-डी सप्लीमेंट्स लेने का सही समय
- विटामिन डी वसा में घुलनशील विटामिन है, जिसका अर्थ है कि यह पानी में नहीं घुलता और वसायुक्त खाद्य पदार्थों के साथ लेने पर रक्त में सबसे अच्छी तरह अवशोषित होता है। इसलिए, अवशोषण को बढ़ाने के लिए विटामिन डी को भोजन के साथ लेने की सलाह दी जाती है। विटामिन-डी सप्लीमेंट्स को ब्रेकफास्ट या लंच के समय अंडे, नट्स, ऑलिव ऑयल या डेयरी के साथ लेना सबसे अच्छा होता है।
- सुबह का समय विटामिन-डी सप्लीमेंट्स लेने के लिए बेस्ट माना जाता है। ऐसा इसलिए क्योंकि, सुबह के समय शरीर का मेटाबॉलिज्म तेज होता है और पोषक तत्वों को अब्जॉर्ब करने की क्षमता ज्यादा होती है।
- विटामिन-डी के सप्लीमेंट्स को रात के समय या शाम को लेने से बचना चाहिए। ऐसा करने से मेलानिन प्रोडक्शन में बाधा आती है, जिस वजह से नींद की क्वालिटी खराब हो सकती है।
विटामिन डी का सेवन कैसे करें?
विटामिन डी के सैशे या पाउडर का सेवन करने वालों को इसे पानी की बजाय दूध के साथ लेना अच्छा होता है। इसका कारण है कि दूध में अच्छे, हेल्दी फैट्स होते हैं। दूध कैल्शियम का एक अच्छा सोर्स है और कैल्शियम और विटामिन डी एक साथ काम करते हैं। जब आपके शरीर में पर्याप्त विटामिन डी होता है, तो यह कैल्शियम को आपकी हड्डियों में अवशोषित करने में मदद करता है। इसी तरह, यदि कैल्शियम का सेवन अच्छा है, तो आंत से रक्तप्रवाह में विटामिन डी का अवशोषण भी बेहतर होता है।
विटामिन-डी सप्लीमेंट्स कितने दिनों तक लेना चाहिए?
विटामिन-डी सप्लीमेंट्स लेने की अवधि व्यक्ति की उम्र, हेल्थ कंडिशन और विटामिन-डी के लेवल पर निर्भर करती है। आमतौर पर, अगर किसी व्यक्ति में विटामिन-डी की कमी पाई जाती है, तो डॉक्टर 8-12 सप्ताह तक सप्लीमेंट्स लेने की सलाह देते हैं। इसके बाद, ब्लड टेस्ट के जरिए से विटामिन-डी के स्तर की जांच की जाती है। यदि लेवल सामान्य हो जाता है, तो डॉक्टर सप्लीमेंट्स की मात्रा कम कर सकते हैं या इसे बंद कर सकते हैं।
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