Health care: आज की तेज रफ्तार ज़िंदगी में शरीर से पहले मन थक जाता है. काम का दबाव, रिश्तों की उलझनें, भविष्य की चिंता और लगातार स्क्रीन के सामने बिताया गया समय, ये सब मिलकर मानसिक स्वास्थ्य को चुपचाप खोखला कर देते हैं. चिंता, गुस्सा और अनिद्रा अब बीमारी नहीं, बल्कि रोज़मर्रा की सच्चाई बन चुकी हैं. ऐसे समय में योग किसी चमत्कार की तरह नहीं, बल्कि एक प्राचीन, भरोसेमंद और वैज्ञानिक समाधान के रूप में सामने आता है. योग केवल शरीर को मोड़ने की क्रिया नहीं है, यह मन को संभालने की कला है. हमारे ऋषियों ने हजारों साल पहले समझ लिया था कि जब श्वास असंतुलित होती है, तो विचार बिखरते हैं और जब श्वास स्थिर होती है, तो मन शांत होता है.
1. भस्त्रिका प्राणायाम

गुस्से को कम करने में भस्त्रिका प्राणायाम काफी मददगार माना जाता है. जब हम तेजी से सांस लेते और छोड़ते हैं, तो हमारे फेफड़ों में ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ती है और शरीर के अंदर ऊर्जा का संतुलन सही होता है. इससे मन में एक शांति महसूस होती है. गुस्सा अक्सर तब आता है, जब हमारे शरीर और दिमाग में एनर्जी इंबैलेंस हो जाती है. भस्त्रिका प्राणायाम इस असंतुलन को दूर करता है.
2. शीतली प्राणायाम

गुस्से को कम करने में शीतली प्राणायाम असरदार है. जब हम गहरी सांस लेते हैं तो शरीर का तापमान और मन की उत्तेजना दोनों कंट्रोल होती हैं. गुस्से के समय शरीर और दिमाग गर्मी और उत्तेजना से भर जाते हैं, जिससे प्रतिक्रिया तेज और कंट्रोल कम हो जाता है. शीतली प्राणायाम करने से शरीर अंदर से ठंडा महसूस करता है और मन शांत होने लगता है, जिससे आप अपनी भावनाओं पर बेहतर कंट्रोल कर सकते हैं. यह एक तरह से मन को ठंडक पहुंचाकर गुस्से को शांत करने की प्रक्रिया है.
3. अनुलोम-विलोम प्राणायाम

मानसिक संतुलन के लिए अनुलोम-विलोम प्राणायाम बेहद लाभकारी है. यह प्राणायाम दिमाग के दोनों हिस्सों को संतुलित करने में मदद करता है. जब दिमाग का संतुलन सही होता है, तो हमारी सोच ज्यादा क्लियर और शांत रहती है. गुस्सा अक्सर तभी आता है. जब दिमाग के कुछ हिस्से ज्यादा एक्टिव और उत्तेजित हो जाते हैं. अनुलोम-विलोम प्राणायाम के रेगुलर अभ्यास से यह असंतुलन दूर होता है और हम ज्यादा संयमित तरीके से अपनी भावनाओं को कंट्रोल कर पाते हैं.
4. बालासन

बालासन भी गुस्से को कम करने में सहायक होता है. जब हम बालासन में झुकते हैं और शरीर को आराम देते हैं, तो मांसपेशियों में जकड़न कम होती है और दिमाग शांत होता है. गुस्सा अक्सर हमारी शारीरिक और मानसिक जकड़न से पैदा होता है और बालासन इसे दूर करने का काम करता है. यह आसन हमारे दिमाग को आराम देने और नकारात्मक भावनाओं को दूर करने में मदद करता है.
5. शवासन

यह बेहद प्रभावशाली आसन है. जब हम पूरी तरह से शरीर को ढीला छोड़ते हैं और ध्यान से सांस लेते हैं, तो नकारात्मक एनर्जी धीरे-धीरे बाहर निकल जाती है. शवासन का अभ्यास मानसिक रूप से हल्का महसूस कराता है और गुस्से जैसी तीव्र भावनाओं को शांत करता है.
इसे भी पढ़ें:-गुरु के समान कोई हितैषी नही: पंकज जी महाराज