Korean game: आजकल ऑनलाइन गेमिंग का क्रेज तेजी से बढ़ रहा है. बड़ी संख्या में बच्चे और टीनएजर्स रोज घंटों ऑनलाइन गेम खेलते हैं, जिससे धीरे-धीरे उन्हें इसकी लत लग जाती है. इन गेम्स की लत जानलेवा भी हो सकती है. यूपी के गाजियाबाद से हैरान करने वाला मामला सामने आया है. यहां 3 सगी बहनों ने 9वीं मंजिल से छलांग लगाकर जान दे दी. तीनों बहनों को कोरियन लवर टास्क बेस्ड गेम खेलने की लत लग गई थी. पैरेंट्स ने जब उन्हें डांटा, तो उन्होंने सुसाइड कर ली. तीनों लड़कियों को ऑनलाइन गेम की आदत इस कदर लग चुकी थी कि वे नहाने, खाने, स्कूल जाने और सोने जैसे सभी काम एक साथ किया करती थीं. इसी तरह तीनों ने एक साथ कूदकर आत्महत्या भी कर ली. मेंटल हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो ऑनलाइन गेमिंग की लत बच्चों की मानसिक सेहत को खराब कर सकती है और वे खौफनाक कदम भी उठा सकते हैं.
क्या है ये कोरियन गेम या लव गेम’?
कोरियाई ‘लव गेम’ एक ऑनलाइन, टास्क-आधारित इंटरैक्टिव गेम है. यह गेम ‘ब्लू व्हेल चैलेंज’ की तरह ही काम करता है, जिसमें खिलाड़ियों को 50 दिनों तक या स्टेप-दर-स्टेप टास्क (कार्य) पूरे करने होते हैं.
यह सोशल मीडिया या मैसेजिंग ऐप के जरिए फैलता है, जहां सामने वाला व्यक्ति खुद को कोरियन या कोई विदेशी युवक/युवती बताकर दोस्ती करता है. शुरुआत में आसान टास्क दिए जाते हैं, जिससे खिलाड़ियों का भरोसा जीता जा सके. धीरे-धीरे टास्क गंभीर और हिंसक हो जाते हैं. जब खिलाड़ी टास्क पूरे नहीं करते या छोड़ना चाहते हैं, तो उन्हें डराया जाता है, ब्लैकमेल किया जाता है और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता है.
नुकसान पहुंचाने की धमकी देते गेम एडमिनिस्ट्रेटर
टास्क पूरे नहीं करने पर गेम एडमिनिस्ट्रेटर जान से मारने या परिवार को नुकसान पहुंचाने की धमकी देते हैं, जिससे खिलाड़ी डर के साये में जीने लगते हैं. इन गेम्स की लत इतनी खतरनाक होती है कि खिलाड़ी अपनी सामान्य जिंदगी, पढ़ाई-लिखाई और परिवार से कट जाते हैं. पीड़ित को यह महसूस कराया जाता है कि उनके पास आत्मघाती रास्ता ही एकमात्र विकल्प है. जब माता-पिता गेम खेलने से रोकते हैं, तो एडिक्टेड बच्चे अत्यधिक गुस्सा या निराशा में आकर ऐसा कदम उठा सकते हैं.
बच्चों के लिए क्यों है खतरनाक, बच्चे क्यों करते हैं सुसाइड?
- जानी मानी मनोचिकित्सक बिंदा सिंह ने बताया कि बच्चों पर ध्यान देना जरूरी है. ये ऐसे गेम होते हैं जिसमें बच्चों को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता है. इसमें बच्चे जुए की तरह पैसे हार जाते हैं. इन गेम्स में अजीबोगरीब तरीके से ब्लैकमेलिंग की जाती है. सिंह ने एक वाकया बताया जिसमें एक बच्ची को गेम के दौरान हारने के बाद एक एक कर कपड़े उतारने को कहा जाता था, बच्ची वो हर बात मानती थी जो उसे कहा जाता था. उन्होंने बताया कि, एक बच्चे को तो अपने शरीर को ब्लेड से काटने को कहा गया था. ऐसे कई तरह के वाकये हैं जिसे सुनकर आप चौंक जाएंगे.
- बिंदा सिंह ने बताया कि चूंकि बच्चों की उम्र कम होती है और पहले तो इन्हें गेम खेलने में मजा आता है लेकिन जैसे ही टास्क पूरा नहीं हो पाता, वहीं से बच्चों को प्रताड़ित करने की शुरुआत होती है. इसमें ऐसे गेम भी होते हैं जिसे मंदबुद्धि बच्चे भी खेल सकते हैं. अक्सर हम बच्चों की जिद पर मोबाइल दे देते हैं और देखते नहीं कि वो क्या कर रहा है. बच्चे जब इन गेमिंग के जाल में फंस जाते हैं तो हारने के बाद परेशान रहते हैं और सबसे बड़ी बात होती है कि वो अपनी बातें शेयर नहीं करते.
- मनोचिकित्सक ने बताया, बच्चों को मोबाइल दें तो चौकस रहें, खासकर टीनएज बच्चों पर ध्यान देना जरूरी है. गेम खेलने के दौरान उनके बिहेवियर पर ध्यान दें. बच्चों को जब इन गेम्स की लत्त लग जाती है तो उनका एडिक्शन इतना बढ़ जाता है कि वो हिंसक हो जाते हैं.
- अगर बच्चे अगर कम बात करें, चुप रहें और अकेला रहना पसंद करने लगें, खासकर रात में सबके सोने के बाद जगे रहें और छुपकर गेम खेलने लगें तो ध्यान देना जरूरी है. अगर आपको पता चले कि बच्चे को गेम की एडिक्शन हो गई है और उनका व्यवहार बदल रहा है तो तुरंत उनसे प्यार से बात करना शुरू कर दें. उन्हें डांटे नहीं, क्योंकि डर के मारे बच्चे क्या झेल रहे हैं, वो बताते नहीं. अपने बच्चे पर ध्यान दें, मोबाइल दें लेकिन उसके साथ सावधान रहें.
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