Diwali 2026: आज पूरे देश में रोशनी का महापर्व दीपावली हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है. कार्तिक मास की अमावस्या पर आज शाम हर घर, मंदिर और दुकान में दीपों की रोशनी से अंधेरा दूर होगा और शुभ मुहूर्त में मां महालक्ष्मी और भगवान श्री गणेश की पूजा की जाएगी. धार्मिक मान्यता है कि दीपावली की रात जो भक्त सच्चे मन से मां लक्ष्मी की आराधना करता है, उसके घर में कभी धन-धान्य की कमी नहीं होती.
इस बार की दिवाली एक और वजह से चर्चा में है. सनातन धर्म की पौराणिक और खगोलीय गणना के एक मत के अनुसार इस बार 7100वीं दिवाली मनाई जा रही है. इस गणना के मुताबिक 2017 में 7091वीं दिवाली थी, जिसके 9 साल बाद अब यह आंकड़ा 7100 तक पहुंच गया है. हालांकि यह एक मान्यता पर आधारित दावा है.
आज है सुखरात्रि और कालरात्रि
पंचांग के अनुसार कार्तिक अमावस्या की रात को सुखरात्रि और कालरात्रि भी कहा जाता है. कथा है कि समुद्र मंथन के दौरान इसी तिथि पर मां लक्ष्मी प्रकट हुई थीं, इसलिए इस रात लक्ष्मी पूजन का अनंत फल मिलता है.
Diwali 2026 Laxmi Pujan के 2 सबसे शुभ मुहूर्त
ब्रजभूमि और राजधानी पंचांग के अनुसार आज पूजा के लिए दो प्रमुख मुहूर्त हैं:
1. गृहस्थ और व्यापारियों के लिए – प्रदोष काल
यह सबसे शुभ मुहूर्त माना गया है.
प्रदोष काल: शाम 5:32 बजे से रात 8:11 बजे तक
स्थिर वृषभ लग्न: शाम 5:54 बजे से रात 7:50 बजे तक
कुल अवधि: 1 घंटा 56 मिनट
मान्यता है कि स्थिर लग्न में पूजा करने से लक्ष्मी घर में स्थायी रूप से निवास करती हैं.
2. साधकों और तांत्रिक पूजा के लिए – महानिशिता काल
महानिशिता काल: रात 11:39 बजे से 12:31 बजे तक
स्थिर सिंह लग्न: रात 12:24 बजे से देर रात 2:41 बजे तक
अमावस्या तिथि कब से कब तक?
8 नवंबर को दोपहर 12:15 बजे से शुरू होकर 9 नवंबर दोपहर 1:28 बजे तक अमावस्या रहेगी.
ऐसे करें मां लक्ष्मी की पूजा, मिलेगा पूरा फल
सबसे पहले पूजा स्थान को साफ कर फूल और रंगोली से सजाएं.
थाली में कुमकुम से स्वस्तिक और अष्टदल कमल बनाएं.
थाली में अक्षत, फूल, शुद्ध घी का चौमुखा दीपक और कपूर रखें.
शुभ मुहूर्त में मां लक्ष्मी और भगवान गणेश का ध्यान कर आचमन करें.
परिवार सहित घंटी, शंख और मंजीरे के साथ आरती करें.
मां लक्ष्मी की आरती
ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता.
तुमको निसिदिन सेवत, हरि विष्णु-धाता॥
उमा, रमा, ब्रह्माणी, तुम ही जग-माता.
सूर्य-चंद्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता॥ ॐ जय लक्ष्मी माता…
आरती के बाद जरूर करें मंत्र पुष्पांजलि
आरती के बाद हाथ में कमल या लाल गुलाब और अक्षत लेकर यह मंत्र बोलें:
ॐ या श्री: स्वयं सुकृतिनां भवनेष्वलक्ष्मी:…
ॐ श्रीमहालक्ष्म्यै नम:, मंत्रपुष्पांजलिं समर्पयामि.
और फूल मां के चरणों में अर्पित कर दें.
भूल के लिए क्षमा प्रार्थना
पूजा के अंत में हाथ जोड़कर यह प्रार्थना करें:
आवाहनं न जानामि न जानामि विसर्जनम्.
पूजां चैव न जानामि क्षमस्व परमेश्वरि॥इसके बाद पृथ्वी पर जल छोड़ें और बड़ों का आशीर्वाद लेकर प्रसाद बांटें.
डिस्क्लेमर: 7100वीं दिवाली का दावा पौराणिक गणना पर आधारित एक मत है. पूजन मुहूर्त ब्रजभूमि पंचांग पर आधारित है, स्थानीय पंचांग में समय में थोड़ा अंतर संभव है.
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