Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा कि नवधा भक्ति, श्रीराम और हनुमान जी का मिलन,श्रीहनुमानजी का माता सीता को पता लगाने के लिये लंका जाना, प्रभु श्रीराम की सेना का समुद्र तट पर पहुंचना, विभीषण शरणागति आदि कथा का वर्णन किया गया। माँ शबरी को प्रभु श्री राम नवधा भक्ति का उपदेश देते हुए कहते हैं कि- संतों का संग सबसे प्रथम भक्ति है।” राजा के पास सुख पाकर भी मत रहना, न जाने कब रुला दे। और किसी साधु के पास थोड़ा दुःख पाकर के भी बैठना, न जाने कब हरी से मिला दे।।” भगवान की कथा में प्रेम दूसरी भक्ति। अमान हो करके संतों की सेवा तीसरी भक्ति। छल कपट का त्याग करके प्रभु का गुणगान करना चौथी भक्ति। मंत्र जाप और भगवान में दृढ़ विश्वास इसको पांचवी भक्ति बताया। मन को धीरे-धीरे संसार से हटाकर भगवान में लगाना, छठवीं भक्ति। सातवीं भक्ति सबमें भगवान का दर्शन करना और संतों के प्रति विशेष आदर रखना। जो कुछ प्राप्त है उसमें संतोष और किसी में दोष का दर्शन न करना ही आठवीं नम्बर की भक्ति है। जीवन में सरलता किसी के साथ छल कपट न करना और भगवान पर भरोसा रखना प्रभु श्री राम ने इसको नवीं भक्ति बताया। प्रभु श्री राम माँ शबरी से कहते हैं कि नव में से अगर एक भक्त भी किसी के जीवन में है तो वह मुझे अति प्रिय है और माँ आप में तो नव की नव भक्ति विद्यमान है।प्रभु श्री राम का हनुमान जी से मिलन, सुग्रीव से मित्रता,श्रीसुग्रीवजी महाराज का राज्याभिषेक, भगवान की सेना का चारों दिशा में भगवती सीता की खोज में प्रस्थान।सुन्दरकाण्ड भक्ति का सोपान है। जिसे ईश्वर की भक्ति पाना है उसके लिए सुन्दरकाण्ड का पाठ अत्यन्त सहायक बनता है। कुछ ऐसे ग्रह गोचर हैं जो हम-सबके शुभ कार्यों में बाधा पहुंचाते हैं। सुन्दरकाण्ड के पाठ से वे बाधाएं समाप्त हो जाती है और जीवन के जितने भी मंगलमय कार्य हैं वह सुखपूर्वक संपन्न होते हैं।सभी हरि भक्तों को पुष्कर आश्रम एवं गोवर्धनधाम आश्रम से साधु संतों की शुभ मंगल कामना,।सभी हरि भक्तों को पुष्कर आश्रम एवं गोवर्धनधाम आश्रम से साधु संतों की शुभ मंगल कामना, श्री दिव्य घनश्याम धाम, श्री गोवर्धन धाम कॉलोनी, बड़ी परिक्रमा मार्ग, दानघाटी, गोवर्धन, जिला-मथुरा, (उत्तर-प्रदेश) दिव्य मोरारी बापू धाम सेवा ट्रस्ट, गनाहेड़ा, पुष्कर जिला-अजमेर (राजस्थान).