30 की उम्र में भी जोड़ों का दर्द, जाने क्यों होते है हड्डियां कमजोर और इसके बचाव

Health tips: उम्र बढ़ने के साथ-साथ, बार-बार होने वाली गतिविधियों के कारण जोड़ों में टूट-फूट शुरू हो जाती है. उपास्थि (कार्टिलेज) – जोड़ों के अंदर मौजूद ऊतक जो उन्हें सुचारू रूप से हिलने-डुलने में मदद करता है – न तो दोबारा बनता है और न ही बढ़ता है, इसलिए समय के साथ प्राकृतिक टूट-फूट जमा होती जाती है. उपास्थि की चिकनी सतह के बिना जोड़ ठीक से हिल-डुल नहीं पाते और न ही उनमें सही तरह का एहसास होता है.

इसके अलावा, जैसे-जैसे आप 30 और 40 की उम्र में पहुंचते हैं — और अपने करियर और परिवार में व्यस्त हो जाते हैं — शारीरिक गतिविधि में कमी आना और वजन बढ़ना आम बात है. इस संयोजन से जोड़ों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है. डॉ. डीफ्रोडा बताते हैं कि सबसे पहले जिन जोड़ों में समस्या आती है, वे आमतौर पर शरीर के निचले हिस्से में होते हैं. इन जोड़ों पर सबसे अधिक वजन पड़ता है और अन्य जोड़ों की तुलना में इनमें अधिक बार-बार हलचल होती है.

विशेषज्ञ का कहना है कि “कार्टिलेज घिसने लग सकता है, उसमें सूजन आ सकती है या वह बचपन की तरह चिकना नहीं रह सकता है. उम्र बढ़ने की प्राकृतिक प्रक्रिया और जोड़ों पर लगातार पड़ने वाले दबाव के कारण दर्द शुरू हो जाता है.” यह खराबी अंततः ऑस्टियोआर्थराइटिस (OA) का कारण बन सकती है, जो गठिया का सबसे आम रूप है.

कौन-सी रोज़ाना की आदतें वैरिकोज वेन्स को खराब करती हैं?

  • लंबे समय तक एक ही जगह बैठना या खड़े रहना: बिना हिले-डुले देर तक बैठने या खड़े रहने से पैरों की नसों पर ज़्यादा दबाव पड़ता है. साथ ही लंबे समय तक हाई हील्स पहनना भी ब्लड फ्लो को प्रभावित करता है, जिससे नसें और कमजोर हो सकती हैं.
  • एक्सरसाइज़ न करना: एक्सरसाइज़ की कमी से पिंडली की मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं, जबकि यही मांसपेशियां नसों में खून को ऊपर की ओर पहुंचाने का काम करती हैं. बढ़ा हुआ वज़न नसों पर दबाव डाल देता है.
  • खाने-पीने की गलत आदतें: बहुत ज़्यादा जंक फूड, तला-भुना और पोषण की कमी वाला खाना नसों की सेहत को नुकसान पहुंचा सकता है.
  • पानी की कमी और कम फाइबर: पर्याप्त पानी न पीने और फाइबर की कमी से खून गाढ़ा हो सकता है और कब्ज की समस्या होती है. इससे पेट का दबाव बढ़ता है, जो पैरों की नसों में खून के बहाव को और बिगाड़ देता है.

कैसे लाइफस्टाइल में बदलाव कर सकते हैं?

पैरों में भारीपन, सूजन या नसों का उभरकर दिखना वैरिकोज वेन्स के शुरुआती संकेत हो सकते हैं. इन्हें नज़रअंदाज़ करना आगे चलकर समस्या को गंभीर बना सकता है. अच्छी बात यह है कि रोज़मर्रा की लाइफस्टाइल में किए गए छोटे-छोटे बदलाव बड़ा असर दिखा सकते हैं.

  • लंबे समय तक बैठने या खड़े रहने से बचें, हर 30–40 मिनट में थोड़ा चलें-फिरें.
  • दिन में कुछ देर पैरों को दिल के स्तर से ऊपर रखने से सूजन कम होती है और ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है.
  • हाई हील्स या बहुत टाइट फुटवियर से बचें, ताकि पैरों की नसों पर दबाव न पड़े.
  • बढ़ा हुआ वजन नसों पर अतिरिक्त दबाव डालता है, इसलिए संतुलित आहार और एक्टिव लाइफस्टाइल जरूरी है.
  • रोज़ाना वॉक, हल्की एक्सरसाइज़ या योग नसों में खून के बहाव को बेहतर बनाते हैं.

इन बदलावों से न सिर्फ नसों की सेहत सुरक्षित रहती है, बल्कि बेचैनी कम होती है और समय के साथ वैरिकोज वेन्स के बिगड़ने का खतरा भी काफी हद तक घटाया जा सकता है.

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